वाराणसी। मां अन्नपूर्णा का दरबार धान की बालियों से सजा रहा। लोग दर्शन पूजन कर रहे थे। भक्त 21, 51 और 501 फेरे तक लगा रहे थे। कहीं घंट-घड़ियाल की धुन तो कहीं मां के सच्चे दरबार का जयकारा लग रहा था। यह आयोजन था अन्नपूर्णा देवी मंदिर में चल रहे 17 दिवसीय महाव्रत के उद्यापन का। गुरुवार को मां के दरबार में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लग गई थी। सदियों से चली आ रही परंपरा में श्रद्धालु सुबह से मां के दर्शन करने और घर परिवार को धन-धान्य से परिपूर्ण होने का आशीर्वाद मांग रहे थे।
मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी ने बताया की यह परंपरा आदि काल से चली आ रही है। किसानों के खेत की पहली फसल होते ही पूर्वांचल के किसान मां के दरबार में धान अर्पित करते हैं। मान्यता यह है कि इससे खेती में किसी प्रकार की समस्या नहीं आती और महाव्रत से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। धान के एक बाल को रखने से धन, धान्य दोनों भरा रहता है। धान के शृंगार के दर्शन के लिए भक्तों का देर रात तक तांता लगा रहा। गुरुवार को भोर में आरती कर मां का पट दर्शन के लिए खोल दिया गया।