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जिले का हर पांचवां बच्चा कुपोषित

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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में कुपोषण की काली छाया मासूमों की जिंदगी तबाह कर रही है। कुपोषण के चलते हजारों बच्चे बीमारों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। मासूमों की हड्डियां टेढ़ी करती इस बीमारी से जंग में कारगर मास्टर प्लान का अभाव देश के कर्णधारों पर भारी पड़ने लगा है। कुपोषण को लेकर प्रशासनिक आंकड़े चौंकाने वाले तथ्य पेश करते हैं। हैरत की बात है कि जिले का हर पांचवां बच्चा कुपोषण का शिकार है।
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भदोही जिले में पांच वर्ष तक के 37055 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें 14451 बच्चे अतिकुपोषित हैं, जबकि 24604 बच्चे कुपोषित श्रेणी में रखे गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे में कुपोषण की भयावह तस्वीर ने हैरत में डाल दिया है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में चिह्नित किए गए शून्य से पांच वर्ष तक के कुल 171636 बच्चों में से 21 फीसदी से अधिक कुपोषण से जूझ रहे हैं। तमाम प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद कालीन नगरी को कुपोषण के डंक से मुक्ति मिलती नहीं दिख रही। कुपोषण के मामले में सबसे खराब हालत भदोही ब्लॉक की है। गत 27 दिसंबर को तैयार विभागीय आंकड़ों के मुताबिक भदोही ब्लॉक में कुपोषित बच्चों की 5774 है, जबकि अतिकुपोषित बच्चे 2474 हैं। कुल मिलाकर यहां 8248 बच्चे कुपोषण की जद में हैं। इसी तरह औराई, डीघ और ज्ञानपुर ब्लॉकों में भी कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का आंकड़ा चिंतित करने वाला है। हालांकि औराई ब्लॉक में इसके बाद कुपोषित बच्चों की संख्या में थोड़ी कमी आई है।
उधर प्रशासन कुपोषण से जंग लगातार जारी रखने का दावा कर रहा है। जिलाधिकारी विशाख जी ने कहा कि समय-समय पर बच्चों का वजन करवाकर उन्हें कुपोषण से बचाने का पूरा प्रयास किया जाता है। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा और बच्चों को कुपोषित नहीं होने दिया जाएगा।
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