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2012 जैसा ही रहा महापौर का नतीजा

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वाराणसी। भाजपा ने निगम के इस बार के चुनाव में करीब-करीब 2012 ही दोहराया। पिछली बार 62,117 वोट से जीती भाजपा इस बार 78,843 वोट से जीती है। पांच साल बाद मतदान बढ़ने के बावजूद भाजपा को 16,766 वोट अधिक मिले। अगर कोई खास बात पहली बार हुई तो यह कि मुस्लिम और यादव मतदाता 60:40 के अनुपात में कांग्रेस और सपा में बंट गए। यही कारण रहा कि कांग्रेस प्रत्याशी शालिनी यादव को 1,13,345 वोट मिले जबकि सपा की साधना गुप्ता को 99, 272 वोट मिले। दोनों के वोट मिलाए जाएं तो यह आंकड़ा महापौर चुनी गई मृदुला जायसवाल को मिले 1,92,188 वोटों से 20,429 वोट अधिक हैं। दोनों दल मिलकर लड़ते तो नतीजा चौंकाने वाला हो सकता था।
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हालांकि भाजपा की जीत में पीएम नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों के अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ की टाउनहाल और रामनगर में हुई सभाओं का असर देखने को मिला। निगम में पार्षदों की संख्या 26 थी जो बढ़कर 39 हो गई है। पार्टी की 13 सीटें बढ़ी हैं। बहुमत के लिए पार्टी को छह और पार्षदों की जरूरत है, जो निर्दलीयों को मिलाकर पूरी हो जाएगी। तीनों विधानसभाओं में पिछली बार से अधिक सीटें आई हैं। उत्तरी में 11, दक्षिणी में 10 और कैंट में 17 सीटें आई हैं। रामनगर में भाजपा तीन से 13 तक पहुंच गई तो यहां से अध्यक्ष चुनी गई कांग्रेस की बागी रेखा शर्मा को भाजपा में शामिल किए जाने की चर्चा है। दूसरी ओर गंगापुर नगर पंचायत में में पार्टी का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा।
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