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सपा से ज्यादा मुसलमानों ने कांग्रेस पर जताया भरोसा

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वाराणसी। लोकसभा, विधान सभा और अब नगर निकाय चुनाव..। मुस्लिम मतों के बिखराव से एक बार फिर से भाजपा को जबरदस्त जीत हासिल हुई। एक ओर जहां मेयर पद पर एक बड़े अंतर से भाजपा ने जीत हासिल की तो वहीं पार्षद की 37 सीटें भी भाजपा के हिस्से में आईं है। जाहिर है कि मुस्लिम मत बंटे। हालांकि मुसलमानों में कांग्रेस पर ज्यादा भरोसा जताया है। चर्चा ये भी रही कि सपा और कांग्रेस गठबंधन से चुनाव लड़ते तो नतीजे कुछ और होते। भले ही विधानसभा चुनाव में गठबंधन असर नहीं दिखा पाया हो लेकिन निकाय चुनाव में नतीजे चौंकाने वाले होते।
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नगर निकाय चुनाव में मुस्लिम वार्ड में ज्यादातर कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी शालिनी यादव को एक लाख से ज्यादा मिले मत भी इस ओर इशारा जता रहे हैं कि मुस्लिमों ने समाजवादी पार्टी से ज्यादा कांग्रेस पर भरोसा जताया है। मदनपुरा, लहंगपुरा, जोल्हा, रसूलपुरा, कमालपुरा, छित्तनपुरा, आगागंज, कमलगढ़हा, कटेहर, जलालीपुरा, बेनिया, काजी सादुल्लाह पुरा, अलईपुरा जैसे कई मुस्लिम वार्डों में कांग्रेस का कब्जा है। दो से तीन मुस्लिम वार्ड में सपा का साइकल चल सका। समाजवादी पार्टी से ज्यादा मुस्लिम वार्डों में निर्दल प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। सरैया, सलेमपुरा, जमालुद्दीनपुरा में निर्दल प्रत्याशियों का बोलबाला रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि नगर निकाय चुनाव में मुस्लिम वोटरों ने निर्णायक की भूमिका निभाई। जानकारों की मानें मुस्लिमों ने समाजवादी पार्टी से ज्यादा कांग्रेस पर भरोसा जताया। यही वजह रही कि सपा की पिछली बार की 38 सीटें 17 में ही सिमट गईं। हालांकि भाजपा ये भी दावा कर रही है कि तीन तलाक के चलते भाजपा को कुछ मुस्लिम महिलाओं के वोट और शिया समुदाय का वोट मिला। शिवाला में भाजपा की जीत ये दर्शा भी रही है।
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