वाराणसी। पंचगंगा घाट से लेकर अस्सी तक मास पर्यंत स्नान, दीपदान और माधव की प्रतिमाओं को बनाकर मोल-तोल करने का उत्सव आरंभ हो गया है। त्रिपुरासुर के वध के उपलक्ष्य में खुशी में कभी देवतदाओं ने दीपोत्सव मनाया था। उसी स्मृति में देव दीपावली महोत्सव पर गंगा तटों पर लाखों दीए जलाने के साथ इस उत्सव की पूर्णाहुति होगी।
काशी के सर्वश्रेष्ठ पंचनद तीर्थ पर ही भगवान विष्णु का वास है, ऐसी मान्यता है। इस महात्म्य को साकार करने के लिए काशी के लोग गंगा तटों पर महीने भर स्नान, दीपदान का उत्सव मनाते हैं। गंगातटों पर आकाशदीपों की शृंखला देवताओं की राह में उजाला करने का उत्सव है। कोजागरी पर श्रीमठ संगीत महोत्सव से इसकी शुरुआत हो गई है। इसके बाद 16 अक्तूबर को गोवत्स द्वादशी पर गाय-बछड़ों की पूजा-आरती उतारी जाएगी। , 17 अक्तूबर को धन कुबेर संग लक्ष्मी पधारेंगी। धन तेरस पर धन वर्षा का महासंयोग आएगा। 18 अक्तूबर को जबां रामभक्ति शिरोमणि हनुमान जी की जयंती का उत्सव मनेगा, वहीं 19 अक्तूबर को ज्योति पर्व दीपावली पर लक्ष्मी पूजा जाएंगी। 20 अक्तूबर को अन्नकूट महोत्सव मनेगा। 28 अक्तूबर को गोपाष्टमी मनेगी तो 29 को अक्षय नवमी पर आंवले के वृक्ष के नीचे भोग लगेगा। श्रीमठ परिवार की ओर से गंगा पार आंवले के बगीचे में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचेंगे। 31 अक्तूबर को बारात निकलेगी। बाजे गाजे के साथ पंचगंगा घाट पर तुलसी विवाह होगा। घाट-घाट पर महिलाएं तुलसी विवाह का उत्सव मनाएंगी। दो नवंबर को बाबा विश्वनाथ, अन्नपूर्णा, ढुंढिराज गणेश, साक्षी विनायक का अभिषेक होगा तो तीन नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी पर तुलसी सहस्त्रार्चन। चार नवंबर को काशी महादीपोत्सव के रंग में देव दीपावली पर्व पर रंगेगी।
फल की प्राप्ति
-कार्तिक पूर्णिमा से प्रारम्भ करके प्रत्येक पूर्णिमा को रात्रि में व्रत और जागरण करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।
-इस दिन कार्तिक के व्रत धारण करने वालों को ब्राह्मण भोजन, हवन तथा दीपक जलाने चाहिए।
-कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि में व्रत करके बैल दान करने से शिव पद की प्राप्ति।
-गाय, हाथी, घोड़ा, रथ, घी का दान करने से सम्पत्ति बढ़ती है।