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पटरी-सड़क सब बेच दी, ट्रैफिक ठेंगे पर

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वाराणसी। एक तरफ शहर को अतिक्रमण और जाम से निजात दिलाने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निर्देश दे चुके हैं वही दूसरी तरफ लंका और उससे सटे नरिया मार्ग पर हालात बेहद हैरान करने वाले हैं। अंदाजा इसी से आप लगा सकते हैं कि सड़कें यहां तकरीबन 50 फीट चौड़ी हैं लेकिन पैदल आना-जाना भी आसान नहीं होता। वजह, सड़क और पटरियों की सौदेबाजी। हैरानी यह कि जिस पर अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी है, उसी नगर निगम और पुलिस ने यहां अतिक्रमणकारियोें को टुकड़े-टुकड़े में एक तरह से पटरियों के साथ सड़क तक बेच दी है। ऑटो के लिए बने गैंग-वे में दुकानें चल रही हैं और सड़क पर बेखौफ संचालित हो रहा है अवैध ऑटो-जीप स्टैंड। दुकानों और अवैध स्टैंडों से हर महीने मोटी रकम वसूली जाती है। वसूली की आड़ में आम जनता की समस्याओं और ट्रैफिक को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
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जबकि लंका-नरिया मार्ग, वही सड़क है, जिस पर दो साल पहले तत्कालीन डीएम प्रांजल यादव और एसएसपी अजय कुमार मिश्र ने व्यापक अभियान चलाकर उसे खाली कराया था। सड़क चौड़ी कराई थी। उसके बाद कुछ महीने स्थितियां बेहतर रहीं लेकिन इनके तबादले के बाद जिम्मेदारों ने पटरियों के साथ सड़क तक की सौदेबाजी कर डाली। पुलिस की शह पर जहां एक ओर लंका चौराहा के चौतरफा अवैध ऑटो स्टैंड और लंका-नरिया मार्ग पर टैक्सी स्टैंड संचालित होता है। वहीं, दूसरी ओर नगर निगम की अनदेखी के कारण ऑटो खड़े होने के गैंग-वे में दुकानें संचालित होती हैं।
चौराहे से नरिया की तरफ बढ़िए तो सड़क के एक तरफ बीएचयू और दूसरी तरफ दवा की दुकानें हैं। दोनों तरफ की पटरियों पर ठेला-खोमचा वाले कब्जा जमाए रहते हैं। उसके बाद एक कतार दो पहिया वाहनों की पार्किंग की लग जाती है। उसके बाद ऑटो वाले कतार लगाकर खड़े हो जाते हैं। इसके बाद बमुश्किल आठ से दस फीट सड़क बचती है। उसी में लोगों की आवाजाही और दोपहिया, चार पहिया वाहनों का रेला। ट्रैफिक की इस धक्कामुक्की से सलामत गुजरना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। यहां थोड़ी ही दूरी पर मंदिर के आगे सड़क पूरी तरह से चार पहिया वाहनों का अवैध स्टैंड बन गई है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति लंका चौराहे से ट्रॉमा सेंटर की तरफ बढ़ने पर भी होती है। मरीजों को लेकर आने वाले वाहन, शव वाहन, टैक्सी की कतार बेखौफ अंदाज में चौबीसों घंटे लगी रहती है। किसी इलाके में भीषण जाम लगने पर जो नजारा होता है, यहां वैसे हालात अक्सर आप देख सकते हैं लेकिन जिम्मेदारों को कुछ नजर नहीं आता।
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एंबुलेंस तक को गुजरने की जगह नहीं मिलती
बीएचयू स्थित सर सुंदर लाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में जिले ही नहीं पूर्वांचल, बिहार और मध्य प्रदेश तक से मरीज आते हैं। ट्रॉमा सेंटर और सर सुंदरलाल अस्पताल पहुंचने के लिए लंका चौराहे को पार करना होता है। नरिया, रविदास गेट और सामने घाट की ओर से आने पर जाम के जंजाल से पार पाना आसान नहीं होता। ट्रैफिक की बेतरतीबी से मरीजों के लिए दवाएं खरीदना तक मुश्किल हो जाता है। आड़े-तिरछे खड़े वाहनों के बीच सड़क पार करने के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। एंबुलेंस तक को गुजरने की जगह नहीं मिल पाती। भयावह हालात होने के बावजूद नगर निगम, लंका थाना और यातायात पुलिस के जिम्मेदारों की आंखें नहीं खुल रहीं।
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