दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में शिष्ट यात्रा का दीक्षांत स्थल पर परंपरानुसार प्रवेश हुआ। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के अनुरोध पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने दीक्षांत समारोह प्रारंभ करने की अनुमति दी। कुलपति ने विश्वविद्यालय के छात्रों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया।
कुलपति प्रो. शर्मा ने स्वागत भाषण में कहा कि यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वाहाकार, विश्व कल्याण यज्ञ, दुर्लभ पांडुलिपियों और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच गांव (मुनारी, तिवारीपुर, गोपपुर, भोपापुर एवं गुरवट) के विद्वान व चित्रकला, निबंध ग्रंथ, कठोपथन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी कुलाधिपति ने सारस्वत उपहार एवं स्मृति चिह्न दिया। इस अवसर पर प्राथमिक विद्यालय मुनारी के छात्र अनमोल यादव ने पर्यावरण संरक्षण पर हिंदी में भाषण और सिमरन राजभर ने संस्कृत में भाषण दिया। कुलाधिपति ने दोनों बच्चों को पुरस्कृत किया। संचालन डॉ. रविशंकर पांडेय ने किया।
आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित
कुलाधिपति ने सोनभद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खिलौने, टेबुल, कुर्सी, चार्ट और पुस्तकें, साइकिल और सिलाई किट आदि का वितरण किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुषमा, साधना विश्वकर्मा, ममता पाठक, प्रतिमा देवी और दीप्ति सिंह को सम्मानित किया गया।
ये रहे मौजूद
इस दौरान केंद्रीय उच्च तिब्बती संस्थान सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी, पूर्व कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग, मेयर अशोक कुमार तिवारी, पद्मभूषण प्रो. देवीप्रसाद द्विवेदी, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. राजनाथ, प्रो. शंभूनाथ शुक्ल, प्रो. विधु द्विवेदी, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, प्रो. सुधाकर मिश्र, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार एवं कार्य परिषद, विद्या परिषद के सम्मानित सदस्य सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित छात्र एवं छात्राएं उपस्थित थे।