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गुरु के बिना जीवन अधूरा : नारद महाराज

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पिंडरा। स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के शिष्य नारद महाराज ने कहा कि व्यक्ति को सही मार्ग पर जाने के लिए गुरु की जरूरत होती है। बिना गुरु के मार्गदर्शन संभव नहीं है। गुरु की महिमा महान है। उन्होंने सोमवार को थानारामपुर स्थित संत हरहरानंद महाराज के आश्रम में आयोजित सत्संग के दौरान गुरु की महिमा बताई।
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उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर संत और गुरु पैदा होते हैं वह भूमि तीर्थ स्थल हो जाती है। हरहरानन्द महाराज को एक तपस्वी और साधनारत गुरु बताया। कहा कि जो गुरु का अनादर किया वह किसी भी लोक में सुख को नहीं प्राप्त हुआ। परमात्मा ध्यान है तो सद्गुरु मार्ग। बिना गुरु के न तो राम पूर्ण हुए न ही कृष्ण। नारद जी ने कहा कि आज हमारे गुरु अड़गड़ानंद महाराज लाखों लोगों के मार्गदर्शक बने हुए हैं। उन्होंने रचित यथार्थ गीता से लोगों को सही धर्म और कर्म का मार्ग बताया है। इसके पूर्व शक्तेशगढ़ से पहुंचा साधुओं का काफिला हरहरानंद के समाधिस्थल पर दर्शन पूजन किया। प्रवचन के अंत में वृहद भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान रामसनेही महाराज व नगीना महाराज, राजकुमार तिवारी, भानुकांत पांडेय, प्रकाशचंद जायसवाल, चंद्रभूषण उर्फ खंजाटी पांडेय, मुन्ना सिंह, जगदीश तिवारी आदि उपस्थित रहे।
प्राचीन शिवधाम मंदिर दरेखू में चल रहे नौ दिवसीय रामचरितमानस कथा के आठवें दिन शिरोमणि दुबे ने कहा की चरित्र ही व्यक्ति को महान बनाता है। भगवान श्री राम का चरित्र जीवन में अनुकरणीय है। भगवान राम ने कभी परायी नारी को गलत दृष्टि से नहीं देखा ओर रावण ने कभी पराई नारी को सही दृष्टि से नहीं देखा। चरित्रवान बनने के लिए धर्मग्रंथों का अध्ययन करना होगा।
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गाजीपुर के पंडित अखिलेश चंद्र उपाध्याय ने कहा कि भक्ति ही सुख का मूल है। संसार के सभी प्राणियों की इच्छा रहती है कि हम सुखी रहें। उन्होंने कहा कि जीवन में जिस सुख को व्यक्ति प्राप्त कर के स्थायी समझ लेता है, वस्तुत: वह सुख नहीं है। वह तो क्षणिक सुख है। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कभी खत्म ना होने वाला दुनिया में कोई सुख है तो वह सिर्फ भगवान की भक्ति है। भगवान की भक्ति में जो आनंद प्राप्त होता है वह संसार की किसी भी वस्तु में नहीं है। इससे मनुष्य का लोक परलोक दोनों संवर जाता है। पंडित नंदलाल मिश्रा ने राम सीता विवाह का व्याख्या कर श्रोताओं को आनंदित किया।
गंगापुर में आयोजित चार दिवसीय रामकथा के बाद भंडारे का आयोजन किया। भंडारे से पहले चौरा माता मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। इस दौरान यहां रामाश्रय उपाध्याय, रविंद्र नाथ शर्मा, मदन मौर्या, भगवती धर दुबे, अरविंद सिंह सहित काफी श्रद्धालु भंडारे की व्यवस्था में सहयोग किया।
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