वाराणसी। बीएचयू अस्पताल प्रशासन की अरुचि के कारण आयुष्मान योजना के तहत हर माह होने वाला भुगतान चार माह बाद भी नहीं हो सका। यह हाल तब रहा जब दवा की आपूर्ति करने वाली फार्मेसी की ओर से हर माह पूरे विवरण के साथ चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय को बिल भेजे जाते रहे। तीन बार रिमाइंडर भी भेजा गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
आयुष्मान योजना के तहत जिन मरीजों का गोल्डन कार्ड बना है, उन्हें चयनित अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज कराने की सुविधा मिलेगी। इसके तहत अस्पताल में दो नवंबर से ही आयुष्मान योजना का काउंटर चल रहा है। उमंग फार्मेसी में बने काउंटर से हर महीने करीब 16 से 18 लाख की दवा मरीज नि:शुल्क ले रहे हैं। नियमानुसार इसका भुगतान अस्पताल प्रशासन की ओर से हर महीने होना है। इसके लिए लाभ लेने वाले मरीजों के विवरण के साथ नवंबर से फरवरी तक हर महीने बिल भी चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय को भेजा जा रहा था, लेकिन इसके भुगतान पर ध्यान ही नहीं दिया गया। जब 11 मार्च को दिन में दवा वितरण बंद हो गया और मरीज परेशान हो गए, तब प्रशासन हरकत में आया। सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में जिम्मेदार लोगों की अरुचि की वजह से ही इस तरह की समस्या उत्पन्न हुई। अब विश्वविद्यालय में बकाए के साथ ही नियमित भुगतान को लेकर रणनीति बनाई जा रही है, जिससे कि मरीजों को परेशानी न हो।
आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को दवाएं मिल रही हैं। बकाये के भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कागजातों की औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं। जल्द ही भुगतान हो जाएगा। -डॉ. एसके माथुर, चिकित्सा अधीक्षक बीएचयू अस्पताल