भदोही/गोपीगंज। मुंबई, हावड़ा और सूरत की ओर जाने वाली किसी भी ट्रेन में 10 जुलाई से पहले बर्थ नहीं है। तत्काल टिकटों का हाल यह है कि भदोही स्टेशन के आरक्षण केंद्र में बमुश्किल दो या तीन टिकट बन पा रहे हैं। ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर और भी बुरा हाल है। यहां जून तक इन शहरों के लिए एक भी सीट उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को दलालों की शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इन दिनों सर्वाधिक मारामारी मुंबई और पुणे के टिकट के लिए है। मुंबई के लिए भदोही से रत्नागिरी सुपरफास्ट, दादर गोरखपुर, कामायनी एक्सप्रेस ट्रेनें हैं, लेकिन उनमें सात जुलाई से पहले टिकट नहीं है। सूरत के लिए केवल एक ट्रेन है, लेकिन वाराणसी या इलाहाबाद से भी बर्थ चाहें तो नहीं मिलेगी। हावड़ा की ट्रेनों में भी यही हाल है। हालांकि मुंबई और सूरत जैसे हालात नहीं है। भदोही आरक्षण केंद्र के आरक्षण पर्यवेक्षक आरएन प्रसाद ने बताया कि 10 बजे और 11 बजे मिलने वाले तत्काल टिकट के लिए यहां भोर से ही लोग आकर लाइन लगा लेते हैं। यदि इंटरनेट ठीकठाक चला तो दो या तीन लोगों को ही टिकट दे पाते हैं। बाकी को मायूस लौटना पड़ता है। सुरियावां से टिकट
के लिए आए अखिलेश मौर्य ने कहा कि दलालों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। रेल मंत्रालय के आदेश हवाहवाई साबित हो रहे हैं। दलाल टिकट दे रहे हैं और साथ में पहचान पत्र भी देते हैं। बदले में मुंहमांगी कीमत लेते हैं। सुरेरी से टिकट लेने पहुंचे शिशिर पांडेय ने कहा कि भदोही, इलाहाबाद, वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर कहीं से भी मुंबई का टिकट नहीं मिल रहा है। ज्ञानपुर रोड स्टेशन से सूरत के लिए दो, मुंबई के लिए पांच, पुणे के लिए दो और दिल्ली के लिए चार ट्रेनें गुजरती हैं। किसी भी ट्रेन में जून तक सीट नहीं है। स्टेशन अधीक्षक प्रदीप सिंह के मुताबिक टिकट के लिए मई-जून सबसे भीड़ वाले महीने हैं। इस समय विभाग को स्टेशन पर दो काउंटर खोल देना चाहिए। रिजर्वेशन के लिए पहुंचे सुरियावां के संजय पाल, गहरपुर के अनीस अंसारी, सहसीपुर बयांव के सुुुुभाष पांडेय, तिवारीपुर के आलोक तिवारी ने बताया कि हम लोग कई दिनों से स्टेशन का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन टिकट नहीं मिल रहा है।