वाराणसी। विश्व धरोहरों में काशी का एक स्थान है। यह प्राचीनतम एकमात्र जीवित शहर विश्व धरोहर की मिसाल है। इसीलिए काशी में पर्यटक बार-बार आते हैं। यहां पर रिपीट टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। धरोहर का संरक्षण ही एक मात्र कार्य नहीं है वरन धरोहर को बचाने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। उक्त विचार काशी गाइड संघ के अध्यक्ष शैलेश त्रिपाठी ने व्यक्त किए। वह गुरुवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पर्यटन अध्ययन संस्थान में विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर आयोजित धरोहर पर्यटन के महत्व विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
पर्यटन संस्थान के निदेशक प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि धरोहर एक निरंतर प्रवाहमान प्रक्रिया है। यह निरंतर चलती रहती है। छात्र अवनीश श्रीवास्तव ने अपनी प्रस्तुति दी। इसके पश्चात शिक्षक डॉ. निशा सिंह ने धरोहर के महत्व और रक्षा का संकल्प दोहराया। इस दौरान डॉ. ज्योतिमा सिंह, शेखर झा, प्रियांशु श्रीवास्तव, आराधना राय, प्रशांत द्विवेदी, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. पवन कुमार, विष्णुकांत उपाध्याय, शशिकांत दुबे आदि मौजूद रहे।
स्कंद पुराण में काशी का उल्लेख है तथा भागवतपुराण में भी प्राचीन काशी के मंदिरों एवं घाटों का वर्णन किया गया है। काशी की प्राचीन विरासत अत्यंत समृद्ध रही है। ज्ञान एवं मोक्ष की इस नगरी में उत्सव एवं पर्वो का विशेष महत्व है। उक्त विचार बीएचयू के प्रो. मारुति नंदन तिवारी ने व्यक्त किए। वह गुरुवार को सनबीम भगवानपुर में विश्व धरोहर दिवस पर इंटैक के संयोजन में सृजन प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान अशोक कपूर मौजूद थे।