वाराणसी। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने आईआईटीयंस को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहने का संदेश दिया। कहा कि अगर सकारात्मक ऊर्जा के साथ काम किया जाए तो सफलता पाने से कोई रोक नहीं सकता है। आईआईटी के स्टूडेंट काउंसिलिंग सर्विसेज की ओर से बीएचयू स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में श्रीश्री ने कहा कि क्वांटम युग आ गया है और विज्ञान तेजी से विकास कर रहा है। ऐसे में खुद को अपडेट रखने की जरूरत है।
बीएचयू स्वतंत्रता भवन में ‘योग: कर्मसु कौशलम्’ (ब्रिगिंग एक्सीलेंस इन एक्शन) विषय पर संवाद में श्रीश्री ने तनाव नियंत्रण, भय नियंत्रण, मानवीय जीवन, आध्यात्मिकता, ध्यान योग आदि विषयों पर खुलकर बातचीत की। कहा कि आत्मबल कैसे जागृत हो, इसके लिए हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए। कहा कि भागती-दौड़ती जिंदगी में तनाव को नजदीक नहीं आने देना चाहिए। आईआईटीयंस हमेशा जीवन में बेहतर करना चाहते हैं। युवा का लक्षण उत्साह होता है। श्रीश्री ने कहा कि शरीर बाती और मन ज्योति की तरह है। इसलिए दोनों का परस्पर साथ जरूरी है। आईआईटी निदेशक ने श्रीश्री का स्वागत करते हुए स्टूडेंट काउंसिलिंग के बारे में बताया। इस दौरान विभिन्न विभागों के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे।
श्रीश्री ने की एससीएस सखा की लांचिंग
बीएचयू स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में श्रीश्री रविशंकर ने स्टूडेंट काउंसिलिंग सर्विसेस (एससीएस) की लांचिंग की। छात्रों की ओर से गठित इस संस्था के माध्यम से एकेडमिक, स्किल, वेलनेस, कॅरियर, इंटरनेशनल एक्सचेंज से जुड़े प्रोग्राम कराए जाएंगे। श्रीश्री ने इस दौरान छात्रों के इस प्रयास की सराहना की।
एसएफसी पदाधिकारियों ने किया विरोध
आईआईटी बीएचयू में श्रीश्री रविशंकर के संवाद कार्यक्रम का स्टूडेंट फार चेंज (एसएफसी) ने विरोध किया है। संगठन की सचिव वंदना की ओर से इसके लिए छात्र-छात्राओं में पर्चे भी बांटे गए। वंदना ने बताया कि श्रीश्री ने स्कूलों के बारे में यह कहा कि सरकार को स्कूल नहीं चलाने चाहिए सिर्फ प्राइवेट स्कूल होने चाहिए। इससे यह पता चलता है कि वह निजीकरण का समर्थन करते हैं। आरोप लगाया कि श्रीश्री अंधविश्वास फैलाने जैसा बयान भी देते रहते हैं। ऐसे में आईआईटी बीएचयू में इनका कार्यक्रम कराया जाना शर्मनाक है।