वाराणसी। जेंडर को वैज्ञानिक तरीके से परिभाषित करने की आवश्यकता है। यदि देश को समानता के साथ विकास करना है तो जेंडर संबंधित समस्याओं पर विशेष ध्यान देना होगा। उक्त विचार लखनऊ विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रो. राकेश चंद्रा ने व्यक्त किए। वह शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं काशी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
लैंगिक बजट के द्वारा महिला सशक्तिकरण विषयक प्रादेशिक कार्यशाला का उद्घाटन भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय स्थित समिति कक्ष में किया गया। बीएचयू की प्रो. मधु कुशवाहा ने कहा कि हमारी किताबों में महिला किरदारों को द्वितीयक स्थान दिया गया है। समाज में समानता लानी है तो महिलाओं को भी पुरुषों के समान जिम्मेदारी देनी होगी। कार्यशाला संयोजक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि बिना समानता के विकास संभव नहीं है। इस मौके पर मंचकला संकाय की छात्राओं ने कुलगीत प्रस्तुत किया। स्वागत प्रो. मल्लिका चतुर्वेदी, संचालन प्रगति यादव और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रेखा ने किया। इस अवसर पर डॉ. अरुण कुमार सिंह की पुस्तक एंपावरिंग वूमेन आफ जेंडरिंग बजटिंग का विमोचन भी हुआ। मौके पर प्रो. बृजेश सिंह, केशरी नंदन शर्मा, रामजतन प्रसाद, हंसराज, प्रो. संजय, भारती कुरील, निमिषा गुप्ता आदि रहे।