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चार साल बाद आठ हजार छात्राओं को मिलेगी डिग्री

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वाराणसी। अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज की आठ हजार छात्राओं की रुकी डिग्रियां अब उन्हें मिलेंगी। कॉलेज की स्वायत्तता पर यूजीसी की ओर से फैसला न होने की वजह से 2014 से 2017 तक की डिग्रियां काशी विद्यापीठ से जारी नहीं हुई थी। अब यूजीसी ने स्वायत्तता का निस्तारण कर दिया और कॉलेज ने नैक को रिपोर्ट भी दी है, तब जाकर विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री देने का फैसला हुआ है। बुधवार को कुलपति ने छात्राओं की डिग्री पर हस्ताक्षर कर उसे कॉलेज को भेजने का निर्देश भी दिया।
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अग्रसेन कॉलेज के बुलानाला और परमानंदपुर परिसर में स्नातक, स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में हर साल करीब तीन हजार छात्राओं का दाखिला होता है। इसमें स्नातक-स्नातकोत्तर में हर साल औसतन दो हजार छात्राएं पास होती हैं। नियमानुसार स्वायतशासी कॉलेज में प्रवेश और परीक्षा की जिम्मेदारी तो कॉलेज प्रबंधन की होती है लेकिन छात्राओं की डिग्रियां काशी विद्यापीठ की ओर से जारी की जाती हैं। अग्रसेन कॉलेज की बात करें तो 2013 तक तो कॉलेज स्वायत्ततशासी था, इसलिए छात्राओं को डिग्री मिलती रही। इसके बाद तत्कालीन प्रबंधन द्वारा स्वायत्तता विस्तारण न कराने से 2014 से 2017 तक पास होने वाली छात्राओं की डिग्री देने से विश्वविद्यालय ने मना कर दिया। इसके बाद कॉलेज की ओर से विश्वविद्यालय से लेकर यूजीसी तक आवेदन कर स्वायत्तता देने की मांग की गई। यूजीसी से स्वायत्तता मिलने के साथ-साथ कॉलेज की ओर से नैक में मूल्यांकन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने की रिपोर्ट भेजी गई, जिसके जनवरी के दूसरे सप्ताह में स्वीकृति होने के बाद डिग्रियां जारी हो रही हैं। उधर कॉलेज के प्रबंधक अनिल जैन ने इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जल्द ही छात्राओं में इसका वितरण कराया जाएगा।
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