वाराणसी। काशी इन दिनों राम मंदिर निर्माण पर चिंतन-मंथन और आंदोलन की रणनीति का केंद्र बन गई है। कुछ जानकार इसे संयोग मान रहे हैं, जबकि कुछ मानते हैं कि सब कुछ पूर्व नियोजित है।
शुक्रवार को संयोग रहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत, चिंतक और विचारक केएन गोविंदाचार्य, योग गुरु बाबा रामदेव शहर में थे। सभी ने रामराज्य की स्थापना पर जोर दिया।
शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विहिप अध्यक्ष न्यायमूर्ति विष्णु सदाशिव कोकजे, राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी, विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय शहर में होंगे। शनिवार को बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष अशोक सिंघल की पुण्यतिथि पर ‘श्रीराम जन्मभूमि मंदिर: स्थिति एवं संभावनाएं’ विषय पर व्याख्यान होगा।
शहर में एक साथ दिग्गजों के आगमन का संकेत है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण की वैचारिकी काशी से दी जा रही है। अयोध्या में 25 नवंबर को विहिप के नेतृत्व में हिंदू संगठनों के जमावड़े से दो सप्ताह पहले संघ के छह दिवसीय प्रचारक वर्ग का शिविर का यहां हुआ। शिविर के शुभारंभ के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत 11 नवंबर को आए थे। 12 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिविर स्थल कोइराजपुर के नजदीक वाजिदपुर में जनसभा की। संयोग देखिए कि शुक्रवार को शिविर के समापन वाले दिन भी प्रधानमंत्री बाबतपुर एयरपोर्ट आए और यहीं से चुनाव प्रचार के लिए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ चले गए।