वाराणसी। फ्लाईओवर हादसे के ठीक बाद प्रशासन की ओर से कराई जा रही है मजिस्ट्रियल जांच महज कागजी खानापूर्ति ही साबित हो रही है। यही कारण है कि हादसे के 12 दिन बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। अब तक तीन घायलों के अलावा सेतु निगम के अधिकारियों के बयान लिए गए हैं। अब तक प्रशासन प्रत्यक्षदर्शियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, एनडीआरएफ सहित अन्य लोगों से संपर्क भी नहीं कर पाया है।
15 मई को फ्लाईओवर की बीम गिरने से 15 लोगों की मौत के मामले में प्रशासन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए एडीएम एफ को मजिस्ट्रियल जांच सौंपी और तीन दिन में रिपोर्ट मांगी थी। एडीएम ने जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा। मगर, इसके बाद जांच की रफ्तार सुस्त हो गई और तीन घायलों व सेतु निगम के अधिकारियों के बयान दर्ज करने के बाद फाइल ठंडे बस्ते मेें डाल दी गई है। नियमानुसार हादसे के बाद मौके पर पहुंचे अलग अलग विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, बचाव कार्य में लगे लोग सहित इससे जुड़े अन्य लोगों के बयान और घटना से जुड़ी जानकारी लेनी है। मगर, घटना से जुड़े अन्य लोगों से संपर्क का प्रयास नहीं किया जा रहा है। मजिस्ट्रियल जांच पूरी करने के लिए तीन जून का समय है, ऐसे में सात दिन में जांच पूरी करना चुनौती है। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का कहना है कि फ्लाईओवर हादसे की मजिस्ट्रियल जांच में समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। हर हाल में जांच रिपोर्ट तय समय पर देनी होगी।