वाराणसी। सुबह-ए-बनारस का मंच सोमवार को काशी के वरिष्ठ संगीतकार प्रो. राजेश्वर आचार्य के सुरों से गुलजार रहा। प्रात: कालीन रागों में से विशिष्ट राग अहीरी ललित में गंभीर आलापचारी से उन्होंने कार्यक्रम का आरंभ किया। इसके उपरांत विलंबित एकताल में निबद्ध स्वरचित बंदिश राम बिना कोउ नहीं अपना...सुनाया तो सभी भक्ति के रस में डूब गए। अगली कड़ी में मध्य तीनताल में निबद्ध रामचरित मानस के पद सुमिर पवनसुत पावन नामु अपने बस करि राखउ रामु... को उन्होंने स्वर दिया।
इसी क्रम में संत रैदास की रचना प्रभु जी तुम चंदन हम पानी...जब सुनाई तो सभी भक्ति रस से विभोर हो उठे। कार्यक्रम का समापन उन्होंने राग भैरवी में निबद्ध गोस्वामी तुलसीदास के भजन जब जानकीनाथ सहाय करे तब कौन बिगार करे नर तेरो...से किया। तबले पर पं. नंदकिशोर मिश्र और हारमोनियम पर नागेंद्र शर्मा और गायन में शिष्य व पुत्र डा. प्रीतेश आचार्य ने संगत की। प्रो. राजेश्वर आचार्य को डॉ. रत्नेश वर्मा एवं पद्मश्री प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल ने प्रमाणपत्र प्रदान किया और माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य एवं पं. प्रमोद मिश्र ने किया।