वाराणसी। सेठ किशोरी लाल जालान सेवा ट्रस्ट के संयोजन में आयोजित 27वें शिवरात्रि संगीत महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को शर्मिला विश्वास के ओडिसी का रंग बिखरा। वहीं दूसरी तरफ पद्मश्री शाहिद परवेज के सितार की सतरंगी सुरगंगा में भी श्रोता देर रात तक डुबकी लगाते रहे।
दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद अंध विद्यालय के प्रांगण में आयोजित महोत्सव की दूसरी निशा का शुभारंभ सुविख्यात ओडिसी नृत्यागंना शर्मिला विश्वास के नृत्य से हुई। उन्होंने नृत्य के जरिए महादेव के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की। पहली प्रस्तुति राग मिश्र, एक ताल में निबद्ध ‘शिव पार्वती शब्द’ रही। तत्पश्चात कल्याण की प्रस्तुति रही जो राग खमाज पर आधारित रही। इसके बाद राम-सीता पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति दी। अगली प्रस्तुति ओडिसी के 12 तालों पर आधारित आवर्तन - बिवर्तन मिश्र राग, ताल मठा, आर ताली, ज्योति, एक ताली तथा विविध तालों पर आधारित रहा। उसके पश्चात शर्मिला विश्वास के यशोदा कथा के भावपूर्ण नृत्य ने सबको भक्तिभाव में डुबो दिया। अंत में उन्होंने शिव पार्वती मोक्ष की प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरी। उनके साथ मोनामी नंदी, त्री पाल, रोहिणी बनर्जी, कृष्णेंदु साहा, रीति मजूमदार, रिया साहा तथा देवत्तवमा सरकार ने संगत की।
महोत्सव की दूसरी प्रस्तुति प्रख्यात सितार वादक पद्मश्री शाहिद परवेज के सितार वादन की रहीं। उन्होंने सबसे पहले राग रागेश्री की धुन प्रस्तुत की। उसके अलावा विभिन्न रागों पर आधारित बंदिश प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके साथ तबले पर हिंडोल मजूमदार ने तबले और छिये नाकायामा ने तानपूरे पर संगत की। इससे पूर्व महोत्सव की दूसरी निशा का शुभारंभ प्रख्यात कथावाचक संत रमेश भाई ओझा ‘भाईश्री’, अनुभवानंद तथा महामंडलेश्वर सतुआ बाबा संतोष दास ने भगवान नटराज की प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर किया। स्वागत कृष्ण कुमार जालान तथा भगीरथ जालान और संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया।