वाराणसी। वरुणा किनारे बेतहाशा कराए गए अवैध निर्माणों के साथ ही नालों से गिरता सीवेज कॉरिडोर के साथ ही नदी संरक्षण की राह में सबसे बड़ी चुनौती हैं। नदी के दोनों किनारे ग्रीन बेल्ट में साल भर पहले से चिह्नित 762 अवैध निर्माणों में एक को छोड़ अब तक कोई दूसरी कार्रवाई नहीं हो पाई है। जबकि, इन्हें नोटिस भी जारी किया जा चुका है। सीवेज रोके बगैर ड्रेजिंग कराए जाने से लाखों रुपये तो खर्च हो गए लेकिन उससे न वरुणा का भला हुआ न कॉरिडोर का। करोड़ों की मिट्टी बाहर से लाकर पाटे जाने का मसला शासन के संज्ञान में है।
सोमवार को सीएम के दूत प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा रजनीश दूबे कॉरिडोर की समीक्षा करेंगे। इसके मद्देनजर रविवार को विधायक रवींद्र जायसवाल के साथ यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन के मुख्य महाप्रबंधक एसएन सिंह ने वरुणा कॉरिडोर का निरीक्षण किया।
नदी विशेषज्ञों का कहना है कि पहली प्राथमिकता वरुणा के संरक्षण की होनी चाहिए और इसके लिए नदी में सीवेज गिरने से रोकने के साथ ही अवैध निर्माणों को हटाकर उसके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित किया जाना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि कॉरिडोर में अनियमितता और मिट्टी भुगतान की फाइल को लेकर तीन अभियंताओं पर गाज गिर चुकी है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक कॉरिडोर के लिए बाहर की मिट्टी लाई ही नहीं जानी थी। ड्रेजिंग से निकली मिट्टी से ही स्लोव और चैनलाइजेशन कराया जाना था लेकिन सीवेज रोके बगैर ड्रेजिंग कराए जाने के कारण मिट्टी के नाम पर सिर्फ गाद ही बाहर निकली। सीवेज न रोके जाने से नदी में वापस फिर गाद भर गई। यूपीपीसीएल ही इस काम को करा रही है। निरीक्षण के दौरान यूपीपीसीएल के मुख्य महाप्रबंधक ने निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। शास्त्री घाट से डीएम बंगले तक इंटरलाकिंग की गुणवत्ता परखी और उन्हें बदलने की हिदायत दी। इस दौरान सिंचाई विभाग के वाराणसी जोन के महाप्रबंधक गोपाल मिश्र, प्रोजेक्ट मैनेजर श्याम जी चौबे मौजूद रहे।