वाराणसी। भेलूपुर थाना क्षेत्र के दुर्गा कुंड स्थित बत्रा बैंक्वेट हाल में बुधवार की रात रेव पार्टी करते 25 युवकों, सात युवतियों और एक महिला की गिरफ्तारी के मामले को पुलिस ने कदम-कदम पर हल्का किया। पुलिस पर नेताओं का दबाव था तो पैसे का प्रभाव भी इतना था कि नशे में धुत मिले युवकों को तुरंत मेडिकल कराने के लिए मंडलीय अस्पताल नहीं भेजा गया। आरोपियों का नशा कम होने देने के लिए इन्हें चंद कदम दूर स्वामी विवेकानंद राजकीय अस्पताल तक ले जाने में आठ घंटे का समय लगा दिया गया।
पुलिस ने बैंक्वेट हाल में रात 11 बजे के बाद छापामारी की थी। 12 बजे तक आरोपियों के नाम-पते की तस्दीक हो गई थी। पुलिस ने इसे उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया लेकिन इनमें से किसी भी आरोपी का मेडिकल कराने की जरूरत नहीं समझी गई। यही नहीं, रेव पार्टी का आयोजन करने वाले नई बस्ती निवासी संतोष वर्मा को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया गया पर उससे पूछताछ नहीं की गई। पुलिस ने यह नहीं बताया कि आखिर वर्मा ने बैंक्वेट हाल की बुकिंग किस मकसद के लिए कराई थी और इतने लोगों के खाने-पीने के लिए क्या और कहां से इंतजाम किया था। रात 11 बजे के बाद भी पार्टी की अनुमति कहां से ली गई थी। बैंक्वेट हाल के संचालक से भी पूछताछ की औपचारिकता ही पूरी की गई है।
बीसी लगाने वाले रईसजादों के मनोरंजन की इस पार्टी में मौके से 69895 रुपये की बरामदगी भी पुलिस को सवालों के घेरे में खड़ा करती है। कहा जा रहा है कि ये सभी लोग बीसी में लगाई जाने वाली राशि के वितरण और अगली बार की बीसी के लिए बड़ी रकम लेकर आए थे। शराब, बियर, गांजा, चरस और अन्य मादक पदार्थों के नशे में धुत आरोपियों ने अश्लील नृत्य करने वाली युवतियों पर रुपये भी लुटाए थे। बरामदगी के बाद ये राशि कहां चली गई, इसे लेकर आरोपियों के परिजन तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। हालांकि फिलहाल परिवारीजनों का पूरा जोर आरोपियों की जेल से रिहाई का है। इसीलिए वे खुलकर पुलिस पर आरोप लगाने से बच रहे हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि बैंक्वेट हाल के मालिक को रेव पार्टी की जानकारी थी। उसने इसके लिए ज्यादा पैसे भी लिए थे। फिर भी पुलिस बैंक्वेट हाल के मालिक से पूछताछ तो की लेकिन कार्रवाई नहीं की।
सूत्रों की मानें तो मामले को हल्का करने के लिए गिरफ्तार आरोपियों के परिवारीजनों को थाने बुला लिया था। करीब चार बजे तक परिवारीजनों से मोल-भाव होता रहा। इसी बीच कुछ नेता भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने इन्हें छुड़ाने के सारे जतन किए। नतीजतन, मामले को हल्का करने की योजना के तहत आरोपियों को मेडिकल भेजने में जान-बूझकर देरी की गई। गुरुवार सुबह आठ बजे के बाद इसके लिए प्रक्रिया शुरू की गई।
शहर के बीचोबीच रेव पार्टी के गंभीर मामले में विभाग के आला अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने मातहत विभागीय अधिकारियों से यह जानकारी लेने की जरूरत नहीं समझी है कि मौके से क्या-क्या नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं? क्या ये नशीले पदार्थ बैंक्वेट हाल मालिक या वर्मा की ओर से तो उपलब्ध नहीं कराए गए थे? वहां अनैतिक देह व्यापार जैसा क्या हो रहा था? इस बारे में एसपी सिटी दिनेश सिंह भी कुछ नहीं बता रहे हैं। मेडिकल में देरी के पीछे उनका तर्क है कि भोर में करीब चार बजे आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। चार घंटे बाद सुबह आठ बजे से मेडिकल कराने की प्रक्रिया शुरू हुई तो 10 बजे के बाद तक चली। बाद में आरोपियों को जेल भेज दिया गया।