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बम विस्फोट के सात साल बाद भी सुरक्षा की मुकम्मल व्यवस्था नहीं

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वाराणसी। शीतला घाट बम धमाके के सात वर्ष बाद गंगा घाटाें की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में पुलिस की ओर से ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है। दशाश्वमेध घाट पर मेटल डिटेक्टर तो रखे गए हैं लेकिन वो कब काम करते हैं और कब खराब हो जाते हैं, यह घाट किनारे के दुकानदारों को भी नहीं पता चल पाता। पुलिस की लापरवाही का ही परिणाम है कि आए दिन दशाश्वमेध घाट किनारे प्रतिबंध के बावजूद ड्रोन कैमरे उड़ते दिखाई दे जाते हैं लेकिन कोई कारगर कार्रवाई नहीं हो पाती है।
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उधर, गुरुवार को शिव सेना महानगर प्रमुख अजय चौबे के साथ पार्टी कार्यकर्ता शीतला घाट पहुंचे। इस दौरान सात दिसंबर 2010 को बम धमाके में मारी गई मासूम स्वस्तिका को शिव सैनिकों ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद आतंकवाद का पुतला फूंक कर पाकिस्तान विरोधी नारेबाजी की। सभी ने मांग की कि गंगा घाटाें सहित शहर के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की मांग की। इस दौरान धनंजय तिवारी, बचानू, बबलू सेठ, बबलू गुप्ता, अंकित शर्मा आदि मौजूद रहे।
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