रामनगर। सामनेघाट-रामनगर के बीच नवनिर्मित मिनी पक्का पुल गुरुवार की शाम लोडिंग टेस्ट में तो पास हो गया लेकिन संपर्क मार्ग को लेकर दुश्वारियां पैदा हो गई हैं। पुल को शास्त्री चौक से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग मानक के अनुसार न बन पाने से हादसों की आशंका से लोग परेशान हैं। पुल पर पैदल चलने के लिए पटरी भी नहीं बन सकी है। लोकार्पण के बाद आवागमन चालू हो जाएगा लेकिन शास्त्री चौक के पास ढहाए गए भवन के मलबे का ढेर तक अभी नहीं हटाया जा सका है। आखिरी छोर पर पुल का संपर्क मार्ग संकरा और घुमावदार होने से लोग चिंतित हैं। कहा जा रहा है कि पुल बनने की जितनी खुशी है, उतनी ही खामियों को लेकर चिंता भी पैदा हो गई है। उधर, सेतु निगम के अभियंताओं ने एप्रोच मार्ग की खामियों से हाथ खींच लिया है। उनका कहना है कि वह काम पीडब्ल्यूडी को करना है। एप्रोच मार्ग की कमियों से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
सामने घाट पुल के एप्रोच मार्ग निर्माण में आखिरी छोर पर स्थित विवादित मकान आड़े आ गया है। इस विवाद को अभी तक सुलझाया नहीं जा सका है। भवन स्वामी अजय पांडेय के कोर्ट जाने और स्थगन आदेश जारी कराने के बाद भी पीडब्ल्यूडी ने इस भवन को ध्वस्त तो करवा दिया था लेकिन संपर्क मार्ग सीधा ले जाने की बजाए उसे दक्षिणी तरफ मोड़ना पड़ गया है। अंतिम छोर पर एप्रोच मार्ग को संकरे घुमाव के साथ शास्त्री चौक की तरफ मोड़ तो दिया गया है लेकिन वहां बड़े वाहनों के आसानी से उतरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। शास्त्री चौक के गोलंबर के पास भी वाहनों को मोड़ने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। शास्त्री चौक निवासी दवा व्यवसायी संदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि हम लोगों को इस पुल से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन काम मानक के अनुसार नहीं किया गया। पुल पर पटरी तक नहीं है तो लोग पैदल चलेंगे कहां से। जरा सी चूक हुई तो कार वाले ठोकर मार देंगे। संपर्क मार्ग इतना संकरा बना है कि जाम लगना तय है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के फुफेरे भाई श्याम मोहन भी पुल निर्माण में बरती गई लापरवाहियों से नाराज हैं। उनका कहना है कि पुल दुर्घटना को दावत देने वाला साबित होगा। पुल की चौड़ाई कम है। रेलिंग भी काफी नीचे है। आजकल लोग मामूली सी बात पर पुलों से कूद कर आत्महत्याएं कर ले रहे हैं। इस पुल पर भी ऐसी घटनाओं के बढ़ने की आशंका है। जाली तक नहीं लगाई गई है। पुल को सुरक्षा को ध्यान में रख कर नहीं बनाया गया है। भवन स्वामी अजय पांडेय का कहना है कि वह नगर का विकास चाहते हैं, बशर्ते सरकार उन्हें उचित मुआवजा दे।