खुशी दुबे की बड़ी बहन और कांग्रेस उम्मीदवार नेहा तिवारी अ्पनी मां के साथ
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कांग्रेसी नहीं दिखा रहे उत्साह, प्रचार राम भरोसे
नेहा तिवारी का काम देख रहे वहां मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं ने अमर उजाला से कहा कि कई स्थानीय नेताओं से आश्वासन तो मिला था लेकिन समर्थन दिखाई नहीं दे रहा है। जब नेहा को सपोर्ट नहीं करने की बात हाईकमान तक पहुंचाई गई तो इसके बाद कुछ नेता जरूर नेहा के समर्थन में आगे आए और बैठकें भी लीं। लेकिन अब फिर कोई स्थानीय नेता नेहा तिवारी के साथ नहीं आ रहा है। जबकि कुछ नेता तो पहले से ही आसपास की विधानसभाओं में अपनी टीम के साथ वहां के कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने में लगे हुए हैं। महिला के दर्द को समझकर प्रियंका गांधी ने नेहा तिवारी को टिकट दिया था। अब प्रचार राम भरोसे चल रहा है।
प्रियंका की थीम के मुताबिक लड़ाई होती नहीं दिख रही
नेहा तिवारी के चुनावी कार्यालय में लोगों ने अमर उजाला से कहा कि प्रियंका जी की थीम के मुताबिक फिलहाल लड़ाई होती नहीं दिख रही। नेहा गरीब परिवार से हैं। उनके पास न गाड़ी है, न साधन है और न ही पैसा है। चुनाव सिर पर है लेकिन अभी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समाज के लोग तो नेहा तिवारी के साथ खड़े हैं लेकिन जो समर्थन कांग्रेस पार्टी के भीतर से नेहा को मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। शायद कांग्रेस की गुटबाजी हावी है। अगर कांग्रेसी अपना समर्थन दें तो ही लड़ाई आसान होगी। जनता बेटी मान कर चुनाव लड़ाना चाहती है। चुनाव में प्रचार प्रसार कैसे किया जाता है हम लोगों को मालूम नहीं। हम अपने स्तर पर प्रचार प्रसार कर रहे हैं। कुछ फंड भी कांग्रेस पार्टी ने दिया है। थोड़ा हम लोग अपने और समाज के स्तर पर कर रहे हैं।
यह कहता है सीट का समीकरण
कल्याणपुर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां हर जाति-वर्ग के लोग रहते हैं। इस सीट की गिनती उन सीटों में होती है जहां अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की तादाद अधिक है। इस विधानसभा क्षेत्र में सामान्य वर्ग के साथ ही दलित मतदाता भी सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।
कांग्रेस ने काफी पहले ही ये आश्वासन दिया था कि उनकी तरफ से खुशी दुबे की मां को कल्याणपुर सीट से उम्मीदवार बनाया जाएगा। कांग्रेस को पूरी उम्मीद थी कि चुनाव में बिकरु कांड को उठा योगी सरकार को भी घेरा जाएगा और वोट भी लिए जाएंगे। बाद में प्रियंका गांधी ने खुशी के परिवार से मुलाकात की थी और उनकी मां को चुनावी मैदान में उतारने का एलान किया था। लेकिन मां गायत्री देवी के नामांकन प्रक्रिया में कुछ दिक्कतों के चलते पेंच फंस गया। फिर कांग्रेस ने खुशी दुबे की बड़ी बहन नेहा तिवारी को कल्याणपुर से प्रत्याशी बना दिया गया।
बिकरु कांड की बात करें तो पुलिस ने कुख्यात विकास दुबे के खास आदमी अमर दुबे को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। अमर की कुछ दिन पहले ही खुशी से शादी हुई थी। बाद में उसकी पत्नी को भी आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया था। इस कार्रवाई पर खूब बवाल हुआ था और बसपा से लेकर कांग्रेस तक, सभी ने इसका विरोध किया था।