ललितपुर जिले के ही टोरिया गांव के अंशुल पुरोहित 33 साल के हैं, प्रधान पद के दावेदार हैं। वह युवा सोच को ग्रामीण विकास के लिए बेहतर मानते हैं, खुद के लिए बेहतर भविष्य भी। अंशुल कहते हैं, ये राजनीतिक जीवन की शुरुआत हो सकती है। मुंबई की कंपनी में काम करने वाले रमेश यादव (45 वर्ष) लॉकडाउन में गांव आए लेकिन फिर वापस नहीं जा पाए। अब वह सिद्धार्थनगर की सेवरा भरौली सीट से क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) का चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, सुल्तानपुर के मझवारा गांव निवासी बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने पुणे से एलएलबी करने के बाद अब अपने गाँव में प्रधानी का चुनाव लड़ रहे हैं।
बीटेक, एमटेक के बाद गांव की राजनीति
कई युवा तो ऐसे हैं जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके बड़ी कंपनियों में नौकरी भी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी गांव की राजनीति भा रही है। अलीगढ़ की इगलास तहसील के रामपुर गांव में रहने वाले मदन (30 वर्ष) बीटेक और एमटेक करने के बाद एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर हैं। इस बार वे जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहे हैं। मदन कहते हैं, गांव से जो रास्ते शहर जाते हैं, वहीं रास्ते शहर से गांव भी आते हैं। मैं किसान का बेटा हूं। पुरानी तौर-तरीकों से लोग ऊब चुके हैं। गांवों की राजनीति में युवा अच्छा काम कर रहे हैं।
चुनावी जंग अब सोशल मीडिया पर भी
अलीगढ़ के बिजौली ब्लॉक के हरनौत-भोजपुर गांव में रहने वाले चेतन शर्मा (24 वर्ष) रसायन शास्त्र एमएससी हैं, उन्हें भी गांव की राजनीति लुभा रही है। युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए चेतन सोशल मीडिया का भी खूब सहारा ले रहे हैं। फेसबुक के माध्यम से वो अपने जनसंपर्क और तैयारियों को लोगों तक भी पहुंचाते हैं।
आकड़ों में त्रिस्तरीय पंचायतें
ग्राम पंचायतें 58,189
ग्राम पंचायत वार्ड 7,32,563
क्षेत्र पंचायत 826
क्षेत्र पंचायत के वार्ड 75,855
जिला पंचायत 75
जिला पंचायत वार्ड 3051