मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य।
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चंद घंटों में ये मालूम चल जाएगा कि अगले पांच साल उत्तर प्रदेश की सत्ता किसके हाथ में होगी। यही नहीं, 403 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे 4442 प्रत्याशियों के भाग्य का भी फैसला हो जाएगा। इस बीच, एक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की सीट से जुड़ा एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है।
दरअसल, इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर सीट से चुनावी मैदान में हैं। वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी के सिराथू और सपा प्रमुख अखिलेश मैनपुरी के करहल सीट से प्रत्याशी हैं। सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव मौर्य के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि अखिलेश यादव के खिलाफ महज दो प्रत्याशी मैदान में थे। अब इसे संयोग कहें या सियासी चाल ये आप पर निर्भर करता है, लेकिन हकीकत यही है।
ऐसा किसलिए होता है?
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह बताते हैं कि कई बार बड़े प्रत्याशियों के वोटों को बांटने के लिए ऐसा किया जाता है। इसके तहत मजबूत प्रत्याशी के खिलाफ उसकी जाति समेत उसके समर्थन वाली अन्य जातियों और धर्म के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशी उतार दिए जाते हैं। इससे वोट बंटने के उम्मीद ज्यादा रहते हैं। जिसका फायदा विपक्ष के उम्मीदवार को मिल जाता है।