क्षेत्र में सिंचाई योजनाओं का विस्तार हो
श्याम नारायण दुबे बताते हैं कि इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन योजना और राशन योजनाओं का लोगों का लाभ मिलता है सरकार अच्छा काम कर रही है और लोग उसके प्रति सकारात्मक दृष्टि रखते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि नई सरकार से यह उम्मीद रखेंगे कि वह इस क्षेत्र में सिंचाई योजनाओं का विस्तार करें, जिससे किसान ज्यादा आसानी के साथ खेती कर सकें और उनकी जिंदगी आसान हो सके।
क्षेत्र की एक आदिवासी महिला गीता बताती हैं कि उन्हें उज्जवला गैस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वे जंगल से लकड़ियां काट कर लाती हैं और उससे चूल्हा जलाती हैं। कलावती बताती हैं कि उन्हें राशन योजना का लाभ मिल रहा है। दुर्गावती बताती हैं कि उनके परिवार के कुछ लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है, लेकिन उन्हें अभी तक आवास उपलब्ध नहीं हो पाया है।
आदिवासियों के लिए अभी और काम करने की जरूरत
आदिवासियों की भलाई के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश बौद्ध बताते हैं कि सरकार काम कर रही है, यहां लोगों को उसका लाभ भी मिल रहा है, लेकिन आदिवासियों की अच्छी खासी संख्या को देखते हुए यह अपर्याप्त है। सरकार को ज्यादा से ज्यादा आदिवासियों को आवास उपलब्ध कराने पर विचार करना चाहिए। क्योंकि यह बहुत दयनीय स्थिति में झुग्गी झोपड़ियों में रहकर अपना जीवन गुजार रहे हैं।
क्षेत्र में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय की टीचर ज्योति पांडे ने अमर उजाला को बताया कि इस स्कूल में दलितों और आदिवासियों के बच्चे पढ़ते हैं। सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग से भी बच्चे पढ़ने आ रहे हैं। उन्हें उचित शिक्षा दी जा रही है। कोरोना वायरस के ज्यादा प्रभावी रहने के समय अभिभावकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई तो अनेक परिवारों ने अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूलों से कटा कर सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया है। इन बच्चों को सही समय से ड्रेस किताबें और मध्याह्न भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस क्षेत्र में शिक्षा की यह किरण लोगों को एक नई उम्मीद बढ़ाती नजर आती है।