प्रदेश में कानून व्यवस्था पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए अखिलेश सरकार ने शुक्रवार शाम को अचानक राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अम्बरीश चंद्र शर्मा को हटा दिया।
उनकी जगह पीएसी के डीजी देवराज नागर को तैनात किया गया है। शर्मा को डीजी होमगार्ड्स बनाया गया है। राज्य सरकार ने इनके अलावा होमगार्ड्स के डीजी अतुल को डीजी पीएसी बना दिया है।
इसके साथ ही मेरठ से हटने के बाद प्रतीक्षा में चल रहे अपर पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह को अब एडीजी सुरक्षा बनाया गया है। देवराज नागर ने रात करीब पौने दस बजे अपना पद भार ग्रहण कर लिया। शासन से निर्देश मिलते ही एसी शर्मा ने नागर को चार्ज सौंप दिया।
कानून-व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवाल के बाद गृह विभाग और पुलिस महकमे के आला अफसरों के प्रति मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाराजगी की चर्चा थी।
मुख्यमंत्री ने गृह विभाग और पुलिस महकमे के साथ अलग-अलग बैठकें कर उन्हें अपने तौर-तरीकों में बदलाव लाने की हिदायत दी थी। उन्होंने खास कर पुलिस महकमे को अपनी छवि सुधारने और तसल्लीबख्श तहकीकात का नजरिया अपनाने पर जोर देने को कहा था।
महकमे ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस दिशा में कुछ कदम भी उठाए थे। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री तुरत-फुरत कोई बदलाव कर गलत संदेश नहीं देना चाहते थे। उन्होंने अफसरों को अपने कामकाज में सुधार का मौका देने की रणनीति बनाई थी। जानकार बताते हैं कि पंचम तल पर पिछले कुछ दिनों से वैकल्पिक उपायों पर भी मंथन चल रहा था।
काफी विचार विमर्श के बाद नए डीजीपी के रूप में 1976 बैच के आईपीएस देवराज नागर की तैनाती का फैसला किया गया है। मौजूदा समय में नागर डीजी पीएसी के साथ ही डीजी पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड में तैनात थे।
1977 बैच के आईपीएस एसी शर्मा को पहले डीजी-पीएसी बनाने की चर्चा थी, प्रमुख सचिव (गृह) आरएम श्रीवास्तव ने इसकी पुष्टि भी कर दी थी। लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि उन्हें डीजी होमगार्ड बनाया गया है। इस फेरबदल में डीजी-होमगार्ड के पद पर काम कर रहे अतुल को डीजी-पीएसी बनाया है।
बार-बार उठते रहे सवाल
एसी शर्मा करीब एक साल डीजीपी के पद पर रहे। इस दौरान, कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर कई बार सवाल उठते रहे। दो दर्जन से ज्यादा सांप्रदायिक दंगे, कुंडा में सीओ का कत्ल, नोएडा में मजदूरों के बवाल व आगजनी से सरकार की खासी किरकिरी हुई है।