वर्मी कंपोस्ट खाद का जायजा लेते सक्षम कटियार।
- फोटो : वर्मी कंपोस्ट खाद का जायजा लेते सक्षम कटियार।
गंजमुरादाबाद (उन्नाव)। नसीरपुर भिक्खन गांव के एक किसान ने वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना शुरू किया है। इस खाद की आपूर्ति बड़े महानगरों तक की जा रही है। इससे लागत से दोगुना मुनाफा आसानी से हो रहा है।
विकासखंड गंजमुरादाबाद के नसीरपुर भिक्खन निवासी 25 वर्षीय सक्षम कटियार ने गांव के बाहर लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे के नजदीक वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर बेचने की प्रक्रिया आरंभ की है। वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए सबसे पहले गोबर एकत्र करना होता है।
जमीन में पॉलीथिन बिछाकर उस पर लंबाई में गोबर डाल दिया जाता है और उसमें केंचुआ डाल कर उसे जूट के बोरों से ढक दिया जाता है। दो माह बाद यह गोबर वर्मी कंपोस्ट खाद का रूप ले लेता है। उसके बाद उसे छान कर एक किलो से 50 किलो तक की पैकिंग कर बेचा जाता है। इसकी कीमत एक हजार रुपये प्रति क्विंटल में बिकता है।
सक्षम ने बताया कि एक बेड के लिए 15 क्विंटल गोबर में 350 रुपये प्रति किलो में तीन किलो केंचुआ डाला जाता है। करीब नौ हजार रुपये लागत आती है। इससे 20 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार हो जाती है। जो बाजार में 20 हजार रुपये तक में बिक जाती है।
खाद की बिक्री जिले के अलावा लखनऊ और कानपुर आदि महानगरों में भी है। कृषि सलाहकार देवी सिंह ने बताया कि किसानों को रासायनिक खादों के बजाय खेतों में वर्मी कंपोस्ट खाद का प्रयोग ही करना चाहिए। इस खाद के प्रयोग से मिट्टी के कण अलग अलग हो जाते हैं।
जिससे खेत में पानी समाहित होने की क्षमता बढ़ जाती है। इसके अलावा इस खाद के उपयोग से खेतों की उर्वरता शक्ति भी काफी बढ़ जाती है। यही नहीं इसके प्रयोग से फसल में कीट और रोग लगने की आशंका भी खत्म हो जाती है।