संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। अपने गुनाहों से निजात पाने की रात शब-ए-बरात रविवार को मनाई गई। लोगों ने रात भर अल्लाह की इबादत की और मगफिरत की दुआ मांगी। लोगों ने अपने मरहूमों की कब्रों पर भी फातेहा पढ़ा।
इस्लामी माह में शब-ए-बरात की खास अहमियत है। 15वीं शब को इबादत का सवाब हजार रातों में की गई इबादत से बेहतर बताई गई है। अंजुमन हैदरिया अब्बासिया कस्बा न्योतनी के मीडिया प्रभारी मुर्तजा हैदर रिजवी ने बताया कि शब-ए-बरात का मतलब निजात की रात से है। इस रात इबादत कर अल्लाह से अपने गुनाहों से माफी मांगनी चाहिए।
रात भर लोगों ने मस्जिदों और घरों में जागकर खुदा की इबादत की। अपने गुनाहों की रोकर माफी मांगी। मुस्लिमों ने अपने मरहूमीन की कब्रों पर जाकर फातेहा पढ़ा। उनकी मगफिरत की अल्लाह से दुआ की। कब्रों पर फूल, इत्र की खुशबू पेश की और रोशनी की। घरों में भी लोगों ने हलवा व अन्य पकवान बनाकर फातेहा ख्वानी कराई।