उन्नाव। एनएचएआई की लापरवाही कभी भी ओवरब्रिज पर काम कर रहे मजदूरों पर भारी पड़ सकती है। राष्ट्रीय स्तर की निर्माण एजेंसी ने भी मजदूरों के सुरक्षा नियमों व श्रम कानून को ताक पर रख दिया और उनकी जिंदगी को संकट में डाल दिया है। लखनऊ-कानपुर राजमार्ग पर रायबरेली क्रासिंग पर हो रहे ओवर ब्रिज निर्माण की हकीकत जानने पर जब अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो सामने आई तस्वीरों ने वास्तव में चौंका दिया। पेश है प्रकाश तिवारी व फोटो जर्नलिस्ट धीरेंद्र सिंह पिंकू की एक रिपोर्ट..........
लखनऊ-कानपुर राजमार्ग ओवर ब्रिज निर्माण स्थल
निर्माण कार्य में तेजी तो दिखी लेकिन इस चक्कर में एनएचएआई अधिकारी नियमों का पालन करना भूल गए। मौके पर कई फिट ऊंचाई पर मजदूर सीढ़ी से चढ़ते हुए मिले। सीमेंट, गिट्टी, लोहे की सरियों के जाल के बीच 30 से 50 फिट की ऊंचाई पर हेलमेट के बगैर चढ़ना उतरना यहां मजदूरों के लिए मजबूरी बनी हुई है। चारों तरफ उड़ती धूल से बचाव के लिए उनके पास मास्क भी नहीं है। मजदूरों की सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन न होने से हादसे का डर बना रहता है। यह स्थिति तब थी जब हाइवे पर निकलने वाले वाहनों से उड़ने वाली धूल उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही थी।
लखनऊ-कानपुर राजमार्ग ओवर ब्रिज निर्माण स्थल
एनएचएआई द्वारा कराए जा रहे ओवर ब्रिज निर्माण में श्रम विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाल मजदूरी पर सख्त कानून व नियम होने के बाद भी ओवर ब्रिज निर्माण में बाल मजदूरी होती दिखी। मौके पर दो बाल मजदूर काम करते देखे गए। निर्माण स्थल पर मौजूद अधिकारियों की भी इस पर नजर नहीं पड़ी। श्रम विभाग ने भी एक बार भी मौके पर जाकर मजदूरों के बारे में जानकारी जुटाने की जहमत नहीं उठाई। हालत यह रही कि यह बाल मजदूर भी बिना हेलमेट व मास्क के हाथों में झाड़ू लिए काम करने में जुटे रहे।
लखनऊ-कानपुर राजमार्ग ओवर ब्रिज निर्माण स्थल
उन्नाव। शहर के उन्नाव-लखनऊ बाईपास पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा आरओबी का निर्माण चल रहा है। इस निर्माण कार्य में सरकार द्वारा तय किए गए पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं हो रहा है। हालात यह है कि यहां पर निर्माणाधीन साइट में ना तो तिरपाल का इस्तेमाल हो रहा है और ना ही निर्माण क्षेत्र में पानी का छिड़काव ही किया जा रहा है। इसके अलावा जगह-जगह पर खुदाई के बाद हुए जानलेवा गड्ढे भी बिना भराई किए ऐसे ही छोड़ दिए गए हैं। पानी का छिड़काव न होेने से निकलने वाले वाहनों से उड़ने वाली धूल निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के साथ ही राहगीरों को भी नुकसान पहुंचा रही है।
वर्जन
मजदूरों के पास हेलमेट व मास्क न होने की जानकारी अभी मिली है। जल्द हेलमेट व मास्क मजदूरों को उपलब्ध कराए जाएंगे। पानी का छिड़काव दिन में दो-तीन बार करवाया जाता है लेकिन गर्मी अधिक होने के चलते यह अधिक समय तक नहीं चल पाता। जिससे धूल की समस्या बनी रहती है। इस समस्या को भी दूर कराने का प्रयास करेंगे। - पी. शिवशंकर, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई लखनऊ-कानपुर राजमार्ग।