विकासखंड की ग्राम पंचायत चांदपुर झलिहई का राजस्व ग्राम ओहरापुर कौड़िया का चयन वर्ष 2014-15 में डा. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में हुआ था। चूंकि यह प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी इसलिए बसपा शासनकाल के अंबेडकर गांव की तर्ज पर लोहिया गांव का भी विकास किया जाना था। शासन ने भी गांव में विकास के लिए लाखों रुपये जारी किए। ब्लाक से लेकर ग्रामस्तरीय अधिकारियों ने गांव में विकास की गंगा बहाने के लिए पानी की तरह से पैसे बहाए। सीसी रोड व नालियों के निर्माण में खूब पैसा खर्च हुआ, लेकिन यह विकास दो साल में ही पानी की तरह ‘बह’ गया। मौजूदा समय में नालियां पूरी तरह से टूट चुकी हैं। गंदा पानी टूटी नालियों के ऊपर से बह रहा है। गांव को जाने वाला मार्ग भी खस्ताहाल होकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। गड्ढों में पानी भरा है। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में खासी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। कमीशनबाजी के चक्कर में शौचालय भी प्रयोग करने लायक नहीं बचे हैं। काफी संख्या में लोग शौचालय का प्रयोग नहीं करते हैं। गांव के कोई भी मार्ग को मुख्य सड़क से आज तक नहीं जोड़ा जा सका है। ऐसे में लोहिया गांव में चयनित होने के बाद भी ओहरापुर कौड़िया गांव अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है।
नोडल अफसर ने लगाई थी चौपाल
इसी साल गांव में जिले के नोडल अफसर व मुख्य विकास अधिकारी ने चौपाल लगाई थी। उस समय ग्रामीणों ने खस्ताहाल मार्गों व ध्वस्त नालियों की शिकायत की थी। लेकिन आज तक नालियां सही नहीं कराई जा सकीं और ना ही रोड की मरम्मत हुई। दोअक्तूबर को कहने को तो गांव में सफाई अभियान चलाया गया लेकिन सिर्फ खानापूरी की गई। बच्चों के प्राथमिक विद्यालय में बाउंड्री तक नहीं बन पाई है।
गांव की कहानी, ग्रामीणों की जुबानी
गांव की महिला सोहधरा पत्नी गजराज ने बताया कि जब उन्हें पता चला था कि ओहरापुर कौड़िया का लोहिया गांव में चयन हुआ था तो गांव में विकास की उम्मीद बंधी थी। सपना देखा था कि शहर की तरह गांव में भी चमाचम सड़कें होंगी। नालियां पक्की होंगी लेकिन यह सपना, ‘सपना’ ही रह गया।
सारा खेल कमीशनबाजी का रहा। मार्ग व नालियों के निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाईं गई। परिणामस्वरुप दो साल में ही मार्ग ध्वस्त हो गए। नालियां टूट गईं और पानी ऊपर से बहकर गांव में हुए विकास की पोल खोल रहा है। यह कहना है गांव के दिलीप राजपूत का।