लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के रायबरेली रेलवे क्रासिंग पर बने ओवरब्रिज के निर्माण में घालमेल की पोल एक साल में ही खुल गई है। पहली बारिश में ही आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) गड्ढों में तब्दील हो गया है। कई ज्वाइंट सरिया बाहर झांक रही हैं। उधर एनएचएआई के अधिकारी रोड के टूटने के पीछे ओवरलोड वाहनों को बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित रायबरेली क्रासिंग पर नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) ने सात सौ मीटर लंबे आरओबी का निर्माण कराया है। करीब सात साल के लंबे इंतजार के बाद आरओबी को जून 2015 में वाहनों के लिए खोला गया था। वैसे तो ओवरब्रिज शुरू होने के बाद से ही इसकी स्लैब के ज्वाइंट्स में दरारें पड़ी शुरू हो गई थीं, लेकिन मौजूदा समय में इस पुल की जर्जर स्थिति ने निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की परत दर परत खोलकर रख दी है। हालात यह हैं कि पूरे ब्रिज में दर्जनों की संख्या में दो से छह फीट चौड़े गड्ढे हो गए हैं। जो किसी भी हैवी वाहन को अनियंत्रित करने के लिए काफी हैं। वहीं इन गड्ढों से निकली गिट्टी पूरे ब्रिज पर फैली हुई है। जो बाइक सवारों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वहीं आरओबी में रेलवे क्रासिंग पर पड़ी स्लैब के ज्वाइंट्स को जोड़ने सरिया भी दिखाई पड़ने लगीं हैं। वहीं कमोबेश कुछ ऐसा ही हाल इस पुल से जुड़े सर्विस लेन का भी है। इसमें पड़ा डामर बारिश के पानी के साथ बह गया है और नीचे की गिट्टी उखड़कर ऊपर आ गई है। जो कि वाहनों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। लेकिन इसमें लिप्त विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान न देते हुए किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं।
रात में नहीं दिखते गड्ढे, होते हैं हादसे
रायबरेली क्रासिंग पर बने आरओबी को रोशन करने के लिए विभाग ने ओवरब्रिज के आधे हिस्से में 32 स्ट्रीट लाइटें लगवाई थीें। इसके बाद से आरओबी का आधा हिस्से में अभी भी स्ट्रीट लाइटें नहीं लग सकी हैं। जिस हिस्से में लाइटें लगी हैं, वह भी आज तक जल नहीं सकी हैं। इससे इस गड्ढे भरे खतरनाक आरओबी पर लोगों को अंधेरे में ही सफर करना पड़ रहा है। गड्ढे न दिखने से अक्सर हादसे हो होते हैं।
जानकारी है जल्द होगी मरम्मत
हाईवे पर रायबरेली क्रासिंग पर आरओबी क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली है। सड़कों की यह स्थिति ओवरलोड वाहनों के कारण होती है। वैसे इस बारे में निर्माणदायी संस्था के अधिकारियों से भी बात की जा रही है। जल्द ही इसकी मरम्मत का काम शुरू करवा दिया जाएगा। पी. शिवशंकर, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।