उन्नाव। आपरेशन स्माइल और शक्ति परी जैसे ऑपरेशन के जरिए अपने सामाजिक सरोकारों को पूरा करने की कोशिश में जुटी पुलिस अब ऑपरेशन ‘साहस’ शुरू करेगी।
डीजीपी के निर्देश पर ऑपरेशन के जरिए पुलिस समाज के निशक्त और मानसिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करेगी। पुलिस इस सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा करने में समाजसेवी संस्थाओं, पुलिस मित्रों और छात्र-छात्राओं की मदद लेगी।
मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम विकलांगजनों में असुरक्षा की भावना दूर करने के साथ ही पुलिस उनकी हर तरह से मदद करेगी। इसकी कार्ययोजना पुलिस महानिदेशक अरविंद कुमार जैन ने भेजी है।
इसके लिए पहले चरण में पुलिस जवानों को यह समझाया जाएगा कि विकालंगजनों के लिए ऐसा संबोधन न करें जिससे उन्हें अपमान का बोध हो। सभी थाना और चौकी स्तर पर निशक्तजनों का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। समय-समय पर पुलिस चिह्नित निशक्तजनों का हालचाल लेती रहेगी।
इतना ही नहीं पुलिस स्वयंसेवी संस्थाओं और पुलिस मित्रों की मदद से उन्हें विकलांग प्रमाणपत्र, पेंशन, रोजगार परक प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास भी करेगी। डीजीपी ने कहा है कि विकलांगजनों की जमीन पर कब्जे, मारपीट, उनके अंगों का व्यापार और शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता है।
पुुलिस की प्राथमिकता होगी कि ऐसे निशक्तजनों को विशेष सुरक्षा और सहायता दी जाए ताकि वह खुद को समाज से अलग न समझें।
अपर पुलिस अधीक्षक रामकिशुन यादव ने बताया कि डीजीपी का सर्कुलर सभी
क्षेत्राधिकारियों को भेजा गया है। पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण देने के
बाद इसपर काम शुरू किया जाएगा।
खास बातें
- सभी थानों में तैयार होगी निशक्तजनों की लिस्ट
- अपमानजनक शब्दों में संबोधन से बचेगी पुलिस
- जमीन पर कब्जा, उत्पीड़न पर तुरंत होगी कार्रवाई
- सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करने को सिपाही लेंगे हालचाल
- शोषण, उत्पीड़न रोकने के लिए हमेशा तैयार रहेगी पुलिस
- विकलांग, पेंशन और रोजगार परक प्रशिक्षण दिलाना प्राथमिकता
- छात्र-छात्राओं को भी मुहिम में शामिल किया जाएगा