उन्नाव। मरीजों की सुविधा के लिए संचालित की गई 108 एंबुलेंस सेवा सिर्फ नाम की ही है। एंबुलेंस में जीवन रक्षक दवाओं का टोटा होने के साथ ही उपकरणों का भी अभाव है। इसके चलते मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका खुलासा डीएम की ओर से कराई गई एंबुलेंसों की गोपनीय जांच में हुआ है।
मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ देने के लिए जिले में 108 एंबुलेंस स्वास्थ्य सेवा संचालित है। इन गाड़ियों में न तो दवाएं हैं और न ही आक्सीजन। ऐसे में मरीजों को सिर्फ गाड़ी में डालकर अस्पताल तक पहुंचाया जा रहा है।
इन एंबुलेंसों की स्थिति जानने के लिए डीएम सौम्या अग्रवाल ने इसकी गोपनीय जांच कराई है। इसमें पता चला है कि कई एंबुलेंसों में ऑक्सीजन, बीपी नापने वाली मशीन, आला, डिलीवरी किट व पैर टूटने के बाद बांधने वाला स्प्लेंट तक नहीं है।
इतना ही नहीं पल्स चेक करने के लिए पल्स ऑक्सीजन मीटर खराब हैं। कई गाड़ियों से तो फर्स्ट एड बॉक्स ही गायब हैं। इस तरह की छोटी-छोटी लगभग पैंतालिस कमियां हैं जिनकी सूची बनाकर जांच अधिकारी ने डीएम को भेजी है।
18 में 13 एंबुलेंसों में कई सुविधाएं गायब
जिले में एक साल पहले 18 एंबुलेंस 108 समाजवादी स्वास्थ्य सेवा की भेजी गई थीं। इनमें तेरह में सुविधाओं का अभाव है। वहीं, पुरवा सीएचसी की एंबुलेंस भेजने के डेढ़ माह बाद ही जल गई थी। उसके बाद अब दोबारा कंपनी ने एंबुलेंस भेजी है। इन अठारह एंबुलेंस में
वर्जन
एंबुलेंस के नोडल अफसर डॉ. मनोज निगम ने भी स्वीकारा की एंबुलेंस में संसाधनों का अभाव है। डीएम के पास शासन की ओर से कोई अनुबंध का प्रस्ताव आया है। उसमें जों कमियां हैं उन्हें दूर कराने के लिए कहा गया है। इसी के तहत जांच कराई गई है। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट भी डीएम को दी है। इस संबंध में सोमवार को बैठक भी बुलाई गई है।