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आवासीय भूमि का मालिकाना हक मिलेगा

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उन्नाव/परियर। ग्रामीणों को आवास व आवासीय भूमि का मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले चरण में सिकंदरपुर सरोसी ब्लाक के गांवों में ड्रोन कैमरों की मदद से पंचायतों में बने मकानों व आवासीय क्षेत्र की भूमि का सर्वे किया गया।
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वर्तमान समय में ग्राम पंचायतों की सरकारी और कृषि से संबंधित भूमि का ही ब्योरा शासन-प्रशासन के पास उपलब्ध है। गांव में बने घरों व आवासीय भूमि के अभिलेख अभी तक नहीं बने हैं। इससे आए दिन गांवों में सहन व आवासीय भूमि को लेकर विवाद व झगड़े होते हैं। कई बार झगड़े खूनी संघर्ष का रूप ले लेते हैं।
इन पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने आवास व आवासीय भूमि के अभिलेख तैयार कराने के लिए स्वामित्व योजना शुरू की है। इस योजना के तहत गांव पंचायत के मकानों व आवासीय भूमि का सर्वे कराकर अभिलेख तैयार कराने और ग्रामीणों को मालिकाना हक देने की व्यवस्था की गई है। कई जिलों में मालिकाना हक का प्रमाणपत्र (घरौनी) देने का काम पूर्व में हो चुका है लेकिन जनपद में बांगरमऊ उपचुनाव के कारण पूर्व में सर्वे नहीं हो पाया था।
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बुधवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट नन्हकू प्रसाद ने राजस्व टीम के साथ मानाबंगला, बंदनपुरवा, बरहली, सदमपुर, बिलारिगोझा, मुबारखपुर, दमगढ़ी, फजपुर, उमरवखेड़ा व पियारेपुर गांवों में गलियों व छतों पर सफेद चूने के पाउडर से लाइन खिंचवाई। इसके बाद ड्रोन कैमरे से आबादी का हवाई सर्वे कराया। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने बताया कि हवाई सर्वे के बाद गांव की आबादी क्षेत्र का नक्शा तैयार किया जाएगा। आबादी भूमि की मैपिंग भी कराई जाएगी। मैपिंग के साथ ही विवादित संपत्तियों पर किए गए दावों और आपत्तियों का निस्तारण होगा। फिर ग्रामीणों को स्वामित्व संबंधी पूरे कागजी प्रमाण (घरौनी) दिए जाएंगे।
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