सोनिक। माघ मेला के दौरान गंगा को प्रदूषण से मुक्त रखने के निर्देशों को टेनरियों व स्लाटर हाउस संचालकों ने अनदेखी कर दी। दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित लोनी ड्रेन में दूषित पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। ड्रेन ओवरफ्लो होने से कई स्थानों पर बनाए गए मिट्टी के बांध भी जवाब दे रहे हैं। शुक्रवार को बांधों को ऊंचा करने के बाद शनिवार को उनमें पतले ड्रेन पाइप लगाकर दूषित पानी निकाला जा रहा है।
प्रयागराज में शुक्रवार से शुरू हुए माघ मेला के दौरान कई शाही स्नान भी होंगे। गंगा में प्रदूषित उत्प्रवाह न गिरे इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी टेनरी व स्लाटर हाउस संचालकों को उत्प्रवाह न छोड़ने या उत्पादन बंद करने के निर्देश दे रखे हैं। इसके बाद भी उत्प्रवाह बंद नहीं हुआ। दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र की टेनरियों व स्लाटर हाउसों का दूषित पानी सिटी ड्रेन में पहले की तरह ही छोड़ा जा रहा है। हालांकि टेनरी व स्लाटर हाउस संचालकों का कहना है कि उन्होंने पानी को गंगा नदी में जाने से रोकने के लिए लोनी ड्रेन में 11 स्थानों पर बांध बनाए हैं। वहीं दूसरी ओर लगातार पानी छोड़े जाने से गुरुवार रात को लोनी ड्रेन ओवरफ्लो हो गई थी। मिट्टी से बनाए गए बांध कट गए थे।
इसपर शुक्रवार सुबह स्लाटर हाउस संचालकों ने आनन फानन जेसीबी से मिट्टी डालकर बांधों को और ऊंचा किया था, लेकिन शुक्रवार रात को पानी और बढ़ने से बांध फिर कटने लगे तो शनिवार सुबह उनमें पतले ड्रेन पाइप लगाए गए। ताकि पानी का बहाव धीमा रहे। हालांकि यह कवायद भी बेमतलब ही साबित होगी। जानकारों का कहना है कि यह कच्चे बांध पानी का दबाव ज्यादा नहीं झेल पाएंगे और किसी भी समय अचानक टूट सकते हैं। इसके बाद दूषित पानी को गंगा में जाने से रोका नहीं जा सकेगा।