उन्नाव। लगभग पांच साल पहले यूपीसीडा की ओर से उद्योगों की स्थापना के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन अभी भी काश्तकारों के नाम ही दर्ज है। चकबंदी अफसरों की लापरवाही से अधिग्रहीत जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हो सकी है। इससे उद्यम स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। मामला डीएम तक पहुंचने पर जांच के आदेश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) द्वारा ट्रांसगंगा सिटी, बंथर व औद्योगिक क्षेत्र दही साइट-दो में संचालित 500 से अधिक उद्यमों को बिजली, पानी, सड़क आदि की सुविधाएं दी जाती हैं। यूपीसीडा ने लगभग पांच साल पहले उद्यम विकास के लिए सदर तहसील के टीकरगढ़ी ग्राम पंचायत में किसानों की लगभग चार एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के दौरान ही गांव में चकबंदी शुरू हो गई।
चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चकबंदी विभाग ने अभी यह जमीन यूपीसीडा के नाम दर्ज नहीं की है। यूपीसीडा का नाम राजस्व अभिलेखों तक में दर्ज नहीं किया गया है। ऐसे में यह जमीन अभी भी किसानों के नाम ही दर्ज है। इससे यहां पर उद्यम लगने में समस्या आ रही है। मामले की जानकारी होने पर डीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
इंसेट-1
वर्जन....
कुछ दिन पहले गूगल मीट के दौरान यूपीसीडा के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी थी। बताया था कि औद्योगिक क्षेत्र साइट-1 में ग्राम टीकरगढ़ी की भूमि का अधिग्रहण किए जाने के बाद भी काश्तकारों का नाम ही चढ़ा हुआ है। अभी तक यूपीसीडा का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया है। मामले में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को जांच के निर्देश दिए हैं। संबंधित अभिलेखों सहित आख्या मांगी गई है।
गौरांग राठी, डीएम।