उन्नाव। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भाजपा और सपा के बीच मुख्य मुकाबले के बीच, भाजपा अपनी अंदरूनी रार में उलझ गई है। सदस्य पद का चुनाव जीत कर आए दो भाजपा समर्थित सदस्य आमने-सामने हो गए हैं। शनिवार को दोनों ने अपना नामांकन कराया। अब संगठन के लोग मसले को सुलझाने की कवायद में जुट गए हैं। मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचने के बाद पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। उनका कहना है कि 29 को नाम वापसी का समय पूरा होने से पहले मसले को हल कर लिया जाएगा। दावा यह भी है कि जीत भाजपा की ही होगी।
बीते बुधवार देर रात को भाजपा जिलाध्यक्ष ने अरुण सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी घोषित किया था। भाजपा ने 17 घंटे के अंतराल में ही उनका टिकट निरस्त कर दिया था। इसके बाद पूर्व एमएलसी स्व. अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया। अरुण ने बागी तेवर अपनाए और इसमें उन्हें सांसद, सदर विधायक और सफीपुर विधायक साथ मिला। इसी के बाद से भाजपा दो गुटों में बंट गई। अरुण और शकुन दोनों ही खुद को भाजपा का सच्चा सिपाही बताते हुए जीत के दावे कर रहे हैं। दोनों का दावा है कि यह चुनाव नंबर का है और उनके पास पूरे 26 नंबर हैं।
हालांकि राजधानी से सटे जिले में पार्टी के भीतर ही घमासान पर प्रदेश संगठन के तेवर तल्ख हो गए हैं। भाजपा प्रदेश संगठन और संघ के पदाधिकारियों ने इसपर नाराजगी जताई है। जिले के पदाधिकारियों से स्पष्ट कह दिया गया है कि वह कोई बयान न दें।
-जिला प्रभारी शंकर लाल लोधी ने बताया कि पार्टी प्रदेश नेतृत्व ही फैसला लेगा। बताया कि 29 को नामांकन वापसी के लिए निर्धारित है। उस दिन तक कोई न कोई फैसला ले लिया जाएगा।
-शनिवार को शकुन सिंह को ही पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी होने का दावा कर रहे भाजपा जिलाध्यक्ष राजकिशोर भी कुछ भी कहने से बचते रहे। सिर्फ इतना कहा जो भी होगा 29 जून को पता चल जाएगा। दावा किया चुनाव में जीत भाजपा की होगी।
सांसद के उठाए सवालों पर संगठन गंभीर, जांच शुरू
भाजपा ने अपने सांसद की ओर से उठाए गए सवालों पर गंभीरता से जांच शुरू की है। प्रदेश संगठन के सूत्रों के अनुसार भाजपा की ओर से अरुण सिंह को प्रत्याशी घोषित करते ही, जिस तरह से उनका नाम पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर केस से जोड़ा गया और पीड़िता का वीडियो वायरल किया गया इसे भाजपा प्रदेश संगठन ने गंभीरता से लिया है।
वोटरों की निगहबानी में जुटे प्रत्याशी
चुनाव मैदान मे उतरे प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष के सदस्यों (वोटरों) की निगहबानी में जुटे हैं। वहीं, अपनी जीत तय करने के लिए प्रत्याशी अधिक से अधिक सदस्यों को पाले में लाने के लिए दिन-रात एक किए हैं। विपक्षी प्रत्याशी के संपर्क में आने और पाला बदलने से रोकने के लिए सदस्यों पर नजर रखी जा रही है। चर्चा है कि एक प्रत्याशी ने समर्थन का वादा करने वाले 17 सदस्यों को टिकट कराकर प्रदेश से बाहर टूर पर भेज दिया है। एक सपा पदाधिकारी ने बताया कि वोटरों को ताकना पड़ रहा है। हालांकि सपा के समर्थन से जीतकर आए सभी 19 सदस्य साथ हैं। वह किसी प्रलोभन में नहीं आएंगे। पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में ही मतदान करेंगे।