बिछिया(उन्नाव)। छुट्टा मवेशियों से परेशान देवरी गांव के किसान ने धान व गेहूं की फसल नहीं उगाई। मवेशियों के नुकसान न पहुंचाने वाली फसल पिपरमिंट की खेती कर उसने अच्छा मुनाफा कमाया। अब उनकी गिनती प्रगतिशील किसानों में हो रही है।
देवरी गांव की आबादी करीब 400 है। यहां का अधिकांश किसान धान व गेहूं की खेती करते हैं। लेकिन छुट्टा मवेशी इन फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे किसानों को फसल का भरपूर लाभ नहीं मिल पाता। छुट्टा मवेशियों के आतंक से परेशान गांव के किसान मुनेश्वर राजपूत तीन सालों से गेहूं व धान की फसल न उगाकर पिपरमिंट की खेती कर रहे हैं।
किसान मुनेश्वर ने बताया कि गेहूं की फसल कटाई के बाद मार्च के अंत में पिपरमिंट की फसल का पौधरोपण होता है। तीन से चार महीने में पिपरमिंट की फसल तैयार हो जाती है। उसे कटवाकर तेल निकाल लिया जाता है। औसतन एक बीघे खेत में 35 से 40 लीटर पिपरमिंट का तेल निकलता है। किसान वह तेल मौरावां के साथ रायबरेली जिले के बछरावां में 1400 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचते हैं। एक बीघे फसल तैयार करने में 15000 रुपये की लागत आती है। तीन महीने बाद फसल तैयार होने पर करीब 40,000 की बचत हो जाती है। उन्होंने बताया कि पिपरमिंट की फसल को छुट्टा मवेशी भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।