उन्नाव। अरे साहब, हम तो जीवन के अंतिम पड़ाव पर हन, अबै तक गांव मां अईस कबौ ना भा, अब ई दिन भी देख रहैन। बच्चा गांव मां तो ज्यादातर किसानी या मजदूरी करै वाले हैं। सबका अपने काम से मतलब है। तीन बिटियन के संग जौन कुछ भा है, वह तो बहुतै गलत है। हमार तो करेजा फटा जा रहा है। बिटियन के घरवालेन पर का बीतत होई।
बबुरहा गांव में एक परिवार की तीन बेटियों के साथ हुए कृत्य से हर कोई हतप्रभ जरूर है पर कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। अपने दरवाजे के बाहर बैठे दो बुजुर्ग बाबूलाल और रामखेलावन की पीड़ा बहुत कुछ बयां कर गई। दोनाें ने कहा कि उनकी 80 साल की उम्र हो गई है। कभी भी गांव में इस तरह की छोटी-मोटी बात तक नहीं हुई। गांव की शांति को पता नहीं किसकी नजर लग गई। बेटियों से कुछ भी काम कह दो झट से कर देती थीं। किसी से कोई झगड़ा भी नहीं था। बुजुर्ग राजाराम ने बताया कि गांव में एक भी चौपहिया वाहन नहीं है। कभी-कभार रिश्तेदारी में आए लोग कार ले आते थे, पर आज तो गांव में वाहनों की बहुत संख्या है। अब पुलिस पर ही सबकी निगाह टिकी हुई है।
डबडबाईं आंखें
पीड़िता के मकान के सामने वाली गली में रहने वाले चच्चू के दरवाजे नेताओं का जमावड़ा लगा था। वह हर आने-जाने वाले को एकटक निहार रहे थे। चच्चू ने डबडबाईं आंखों से बताया कि तीनों बेटियां सभी की दुलारी थीं।