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करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं मिल रहा इलाज

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर चौरासी। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सरकार ने जिले में करोड़ों रुपये खर्च कर बिल्डिंग तो खड़ी कर दी, लेकिन तीन साल बाद भी न तो सीएचसी के मानकों के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती हुई और न ही उपकरण उपलब्ध कराए गए। इससे मरीजों को जिला अस्पताल की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ता है। फतेहपुर चौरासी की 30 हजार, माखी क्षेत्र की 20 हजार और गंजमुरादाबाद क्षेत्र की 40 हजार आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। माखी गांव में बने नये सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तो महीनों से ताला लगा है।
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पांच करोड़ से बना भवन, नहीं बढ़ा स्टाफ
फतेहपुर चौरासी प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण कर वर्ष 2017 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला। पांच करोड़ की लागत से वर्ष 2019 में बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई और अस्पताल का संचालन भी शुरू हो गया। अभी तक सीएचसी के मानक के अनुसार न स्टाफ तैनात हुआ और न ही जांच के लिए उपकरण लगे। इससे क्षेत्र के लोग अभी भी बांगरमऊ सीएचसी या जिला अस्पताल पहुंचकर इलाज कराने को मजबूर हैं।
पांच महीने बाद भी नहीं मिल सके उपकरण
गंजमुरादाबाद प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक मुख्यालय में पांच करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से सीएचसी की बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। 28 सितंबर 2020 को सीएचसी की शुरुआत भी कर दी गई। जनवरी महीने से ओपीडी भी संचालित कर दी गई है। हकीकत यह है कि न तो जांच के लिए मशीने हैं और न ही मानक के अनुसार स्टाफ है। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. संजीव वर्मा के मुताबिक स्टॉफ और उपकरण न होने से गंभीर मरीजों को देख पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
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दो साल से माखी सीएचसी में लगा है ताला
चकलवंशी प्रतिनिधि के अनुसार मियागंज ब्लॉक के गांव माखी में 4.75 करोड़ रुपये की लागत से बिल्डिंग बनकर दो साल से तैयार है। सीएचसी के संचालन के लिए तीन पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती भी हुई। चार महीने पहले एक दिन के लिए स्वास्थ्य केंद्र का ताला खोला गया था। उपकरण और अन्य स्टाफ के अभाव में तैनात स्टाफ ने भी जाना बंद कर दिया। वह मियागंज स्वास्थ्य केंद्र में बैठने लगा और सीएचसी में ताला डाल दिया गया।
प्रभारी सीएमओ बोले
सीएचसी संचालन के प्रयास किए जा रहे हैं। स्टाफ व उपकरण की तैनाती शासन से होनी है। इसके लिए कई बार शासन को पत्र भी लिखा है, लेकिन अभी कोई जवाब नहीं आया है।
डॉ. तन्मय कक्कड, प्रभारी सीएमओ
यह होनी चाहिए व्यवस्थाएं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के संचालन के लिए पांच डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय, स्वीपर, लैब टेक्नीशियन, अल्ट्रासाउंड मशीन, पैथोलॉजी में जांच करने के लिए उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में यह व्यवस्थाएं नहीं है।
लोगों की बात
गंजमुरादाबाद ब्लॉक के गांव सिरधरपुर निवासी रामवती ने बताया कि बहू मालती के प्रसव के लिए सीएचसी आईं। यहां महिला चिकित्सक न होने से प्रसव नहीं हो पाया। इससे बांगरमऊ जाना पड़ा। फतेहपुर चौरासी के गांधीनगर के संतकुमार त्रिवेदी ने कहा कि मरीजों के पास न ही पर्याप्त दवाएं हैं और न ही मरीजों के उपचार की सुविधा। दिन में तो फिर भी डॉक्टर मिलते हैं। रात की स्थिति और भी खराब है।
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