उन्नाव। जिले के चर्म उद्योगों में काम करने वाले मजदूर गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं। बीएचयू के भूगोल विभाग के विज्ञान संस्थान की ओर से किए गए विस्तृत शोध में यह खुलासा हुआ है। अध्ययन के अनुसार लगभग 58 फीसदी श्रमिक एक से अधिक गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
बीएचयू के भूगोल विभाग की प्रतिनिधि अनुष्का गुप्ता ने टीम के साथ जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में टेनरियों व चर्म इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों के स्वास्थ्य पर शोध किया था। शोध के अनुसार 58 फीसदी श्रमिक किसी न किसी बीमारी से पीड़ित पाए गए। सबसे अधिक त्वचा और श्वसन तंत्र की बीमारियों से प्रभावित हैं। इनमें 46 फीसदी श्रमिकों को एक्जिमा, चकत्ते, फोड़े-फुंसी और रसायनों से त्वचा जलने जैसी गंभीर समस्याएं हैं। वहीं, 40 फीसदी मजदूर शरीर, हाथ-पैर, घुटने और जोड़ों के दर्द से परेशान हैं।
कारखानों के भीतर जहरीले धुएं, गैस और चमड़े की धूल के कारण 27 फीसदी मजदूरों को सांस संबंधी दिक्कतें हैं। 37 फीसदी श्रमिकों ने लगातार बुखार और अत्यधिक थकान की शिकायत की है। इसके अलावा, 19 फीसदी सिरदर्द और 13 फीसदी पाचन व पेट की समस्याओं से ग्रस्त हैं। शोध पत्र के मुताबिक, 70 फीसदी श्रमिक दूषित और रसायन-युक्त पानी के संपर्क में काम करते हैं।
चर्म उद्योग में क्रोमियम, सल्फाइड और फॉर्मल्डिहाइड जैसे जहरीले रसायनों का उपयोग होता है। ये रसायन त्वचा रोग, सांस की बीमारियां और लंबे समय में कैंसर जैसे गंभीर जोखिम पैदा करते हैं। 51.4 फीसदी श्रमिकों को त्वचा पर तेज जलन का सामना करना पड़ता है। 40 फीसदी श्रमिकों को कारखानों के भीतर हानिकारक धुएं और गैसों का सामना करना पड़ता है। (संवाद)
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
बीएचयू का यह विस्तृत शोध अध्ययन बंथर लेदर टेक्नोलॉजी पार्क, ईस्टर्न औद्योगिक क्षेत्र और अकरमपुर स्थित टेनरियों पर केंद्रित था। अध्ययन में 33 प्री टैनिंग, 34 टैनिंग और 33 फिनिशिंग प्रक्रिया से जुड़े श्रमिकों को शामिल किया गया। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने श्रमिकों को स्वस्थ रखने के लिए मानक तय किए हैं। इन निर्देशों में रसायनों से सुरक्षा और नियमित स्वास्थ्य जांच शामिल है।
वर्जन...
स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से फैक्टरियों में समय-समय पर शिविर लगवाया जाता है। इसमें श्रमिकों की जांच कराकर रिपोर्ट के आधार पर दवाएं वितरित की जाती हैं। गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल में संचालित ईएसआई अस्पताल में इलाज कराने की सलाह भी दी जाती है। -एसएन नागेश, श्रमायुक्त
सामूहिक जांच के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं। विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम फैक्टरी श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। जिस तरह की बीमारी या संक्रमण की पुष्टि होती है, इलाज किया जाता है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर नजदीकी अस्पताल में भी निशुल्क परामर्श और इलाज की सुविधा दी जाती है। -डॉ. अजय शर्मा, सीएमओ