उन्नाव। अपर सत्र न्यायाधीश/पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह यादव ने अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। न्यायाधीश ने मुकदमे के दौरान शुरुआती बयानों से मुकरने पर वादिनी के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।
गंगाघाट थाना क्षेत्र की महिला ने 26 दिसंबर 2020 को पुलिस को तहरीर दी थी। बताया कि 24 दिसंबर को 16 वर्षीय बेटी शौच के लिए घर से निकली थी। काफी देर तक न लौटने पर आसपास व रिश्तेदारी में बेटी की खोजबीन की लेकिन पता नहीं चला। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर किशोरी की तलाश शुरू की। कुछ दिन बाद पुलिस ने उसको ढूंढ़ निकाला।
किशोरी ने बताया कि घटना वाले दिन गंगाघाट थानाक्षेत्र के बसधना गांव का अभिषेक उर्फ रंजय मिला। वह उसे महिला के साथ अलीगढ़ लेकर गया। वहां अभिषेक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जांच के बाद पुलिस ने अभिषेक के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान मुख्य गवाहों के बयान अभियोजन की कहानी के अनुरूप नहीं रहे। पीड़िता न्यायाधीश के सामने अपने पूर्व में दिए बयानों से मुकर गई। उसने कहा कि वह मां से नाराज होकर अपनी इच्छा से घर से गई थी। पीड़िता ने अभियुक्त पर दुष्कर्म या किसी अन्य आपराधिक कृत्य का आरोप लगाने से इन्कार किया। मां ने भी मुकदमे के दौरान पूर्व कथनों के विपरीत बयान दिए। इस पर न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह यादव ने अभिषेक उर्फ रंजय को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने वादिनी के खिलाफ धारा 344 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं।