फोटो-11-टेनरी में निरीक्षण के दौरान उद्यमी से जानकारी लेते जल निगम के एमडी डॉ. राजशेखर। संवाद
सोनिक। दही औद्योगिक क्षेत्र के कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के अपग्रेडेशन और क्षमता वृद्धि में आ रही दिक्कतों के निराकरण के लिए जल निगम के प्रबंध निदेशक ने टीम के साथ शुक्रवार को निरीक्षण किया। अधिकारियों से 10 साल के चर्म उत्पादन का ब्योरा एक सप्ताह में देने के लिए कहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को टेनरियों में लगाए गए क्रोमियम रिमूवल प्लांट की जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर ने पांच सदस्यीय टीम के साथ सीईटीपी का निरीक्षण किया। उन्होंने सीईटीपी से जुड़े सभी 16 उद्यमियों के साथ बैठक की। उद्यमियों ने बताया कि चर्म का उत्पादन लगातार कम हो रहा है इसलिए सीईटीपी की क्षमता कम करने और लागत कम करने के लिए क्रोमियम रिमूवल प्लांट न लगाने की बात कही।
बताया कि फैक्टरियों में निजी स्तर पर क्रोमियम रिमूवल प्लांट लगे हैं। इस पर कमेटी के सदस्यों, एनएमसीजी के सदस्य डीएम ने ऑनलाइन बैठक में जुड़कर विचार रखें। प्रबंध निदेशक ने कहा कि 10 साल में सीईटीपी से जुड़ी फैक्टरियों के चर्म उत्पादन का पूरा विवरण एक सप्ताह में उपलब्ध कराएं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शशि बिंदकर से फैक्टरियों में लगे क्रोमियम प्लांटों का सत्यापन करने और उनके संचालन की स्थिति पता लगाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि फैक्टरियों के आउटलेट से निकलने वाले पानी व सीईटीपी के इनलेट का नमूना लेकर परीक्षण कर एक सप्ताह में रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। इसके अलावा फैक्टरियों व सीईटीपी द्वारा शोधित जल के परीक्षण की रिपोर्ट तीन दिन में उपलब्ध कराई जाए। कहा इसके बाद ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सीईटीपी की क्षमता बढ़ाई जाए अथवा नहीं।
यहां फंसा है पेंच
सीईटीपी छह वर्षों से 50 प्रतिशत डिस्चार्ज के साथ चल रहा है। कई बार बैठक हो चुकी है लेकिन सभी बेनतीजा रहीं। उद्यमी अपने हिस्से का पैसा अधिक बताकर देने के लिए तैयार नहीं थे। डीएम गौरांग राठी को सीईटीपी का अध्यक्ष बनाया गया। पहले 114 करोड़ की लागत से 2.6 एमएलडी की बननी थी, इसका टेंडर भी हो चुका था। हालांकि अब 1.4 एमएलडी बननी है जिसकी लागत 67 करोड़ रखी गई है। इसका 25 प्रतिशत उद्यमियों को देना है। नमामि गंगे की तरफ से स्वीकृति मिलने पर काम शुरू होना है।