फोटो-17-कथा सुनातीं साध्वी गोपिका। संवाद
फतेहपुर चौरासी। कस्बे के रामजानकी पैलेस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन साध्वी गोपिका ने भक्त ध्रुव और द्रौपदी की कथा सुनाई। कहा कि जहां समस्या है, वहीं समाधान है।
साध्वी ने बताया कि भक्त ध्रुव सौतेली मां से अपमानित होकर बाल्यावस्था में ही गुरु नारद के मार्गदर्शन से विष्णु की कठोर तपस्या की और अटल ध्रुव लोक के स्वामी बने। पिता की गोद से बहिष्कृत होकर, जगतपिता की गोद प्राप्त कर सिद्ध कर दिया कि विषम परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए।
द्रोपदी की कथा सुनाते हुए कहा कि क्षमता होने के बाद भी पाप और अन्याय को न रोकना अपराध है। कौरवों ने छल से जुए में युधिष्ठिर को हराकर द्रोपदी के चीरहरण जैसी अमानवीय घटना को अंजाम दिया। हालांकि भगवान कृष्ण की कृपा से दुर्योधन असफल रहा। नारी का यह अपमान महाभारत का कारण बना। कथा सुनने वालों में चेयरमैन मिथलेश जायसवाल, श्याम जी वर्मा, रानी देवी भी रहे। (संवाद)
फोटो-17-कथा सुनातीं साध्वी गोपिका। संवाद