उन्नाव। दुर्घटना बहुल स्थलों में शामिल दही चौकी तिराहे पर निजी एजेंसी की ओर से कराए गए सुरक्षात्मक कार्य सात महीने भी नहीं टिक सके। यातायात सुरक्षा के लिए रखे गए उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। संकेतक और रेडियम पट्टियां भी धुंधली हो गई हैं।
निजी संस्था सेफ लाइफ फाउंडेशन दुर्घटना बाहुल्य स्थलों का चिह्नांकन करके वहां पर सुरक्षा से संबंधी काम कराती है। संस्था ने 2024 में कानपुर-लखनऊ हाईवे पर पड़ने वाले दही चौकी तिराहे का सर्वे किया था। पता चला कि वर्ष 2021 से मार्च 2024 तक इस तिराहे पर 16 हादसे हुए। इनमें नौ की मौत हो गई।
इसके बाद संस्था ने एनएचएआई के साथ मिलकर यहां पर सुरक्षा के प्रस्तावों की जानकारी अधिकारियों को दी। मंजूरी मिलने के बाद दही तिराहे पर सुरक्षा के लिए बीच तिराहे पर पीली व सफेद पट्टी बनाई थी। साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए अलग ट्रैक बनाया था। जगह-जगह संकेतक व यातायात नियमों के बोर्ड लगवाए थे। 26 मार्च को तत्कालीन मंडलायुक्त रोशन जैकब ने दही तिराहे पहुंचकर इसका जायजा भी लिया था। उन्होंने संस्था के इस काम की सराहना भी की थी। हालांकि ये काम साल भर भी नहीं चल सके। सात माह में ही व्यवस्थाएं ध्वस्त होने लगीं।
अलग ट्रैक पर कब्जा, प्लास्टिक के पोल भी टूटे
संस्था ने साइकिल व पैदल चलने वालों के लिए अलग ट्रैक बनाया था। दुकानदारों का अतिक्रमण रोकने के लिए प्लास्टिक के पोल भी लगाए थे। ये पोल टूट गए हैं। ट्रैक पर फिर से दुकानदारों का कब्जा हो गया है। यातायात बोर्ड भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पीली व सफेद पट्टी भी मिटने लगी है। साथ ही कई संकेतक व यातायात नियमों के बोर्ड भी खराब होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
निजी संस्था ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दही चौकी तिराहे पर सुरक्षात्मक कार्य कराए थे। इसके जरिए देखना था कि इस तरह के उपाय कितने समय तक चल सकते हैं। दही चौकी तिराहा कानपुर-लखनऊ हाईवे का सबसे व्यस्ततम है। इसलिए यहां पर यातायात भी अधिक है। तिराहे पर सुरक्षात्मक कार्यों की स्थिति की जानकारी निजी संस्था को दी जाएगी। इसके बाद संस्था क्या कदम उठाएगी, उसे देखा जाएगा। -हरदयाल अहिरवार, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग।
फोटो-6-क्षतिग्रस्त पड़े दही चौकी तिराहे पर सुरक्षा को लेकर लगाए गए प्लास्टिक के पोल। संवाद