उन्नाव। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पीछे मिले मरीज के शव की घटना ने उसके इलाज और देखभाल में बरती गई लापरवाही उजागर कर दी। जांच में पता चला कि युवक को 15 फरवरी को अज्ञात में भर्ती कराया गया था। दावा है कि बाद में उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था लेकिन स्टॉफ ने पुलिस को सूचना नहीं दी। अब न तो उसका बेड हेल्थ टिकट (बीएचटी) मिल रहा है और न ही वीडियो फुटेज। सीएमएस का बयान नशे के लती मरीजों पर हर समय नहीं रखी जा सकती नजर ने संवेदनाओं का दम घोट दिया।
शुक्रवार की दोपहर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पीछे करीब 35 साल के युवक का कई दिन पुराना शव मिला था। दुर्गंध आने पर इसका पता चला। हाथ में वीगो लगी होने से मरीज होने की पुष्टि हुई थी। शनिवार को पुलिस ने जांच के दौरान अभिलेख खंगाले तो पता चला कि उसे 15 फरवरी को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया था। उसके पैर और शरीर में कई जगह चोटें थीं। घायल की पहचान कराई जा सके इसके लिए पुलिस को सूचना भी नहीं भेजी गई।
इमरजेंसी वार्ड के स्टॉफ का दावा है कि घायल को बाद में जिला अस्पताल के वार्ड-दो में शिफ्ट कर दिया गया था। हालांकि उसकी उसका बेड हेल्थ टिकट (बीएचटी) भी नहीं मिल रहा है। स्टॉफ का कहना है कि मरीज वार्ड से कब चला गया, पता ही नहीं चला। स्टॉफ से जब युवक से संबंधित जानकारी मांगी गई तो इमरजेंसी वार्ड और जनरल वार्ड के चिकित्साकर्मी एक दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे।
पहले भी हुई है लापरवाही
जिला अस्पताल में जिम्मेदारों की संवेदनाओं की ‘मौत’ की ये पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई लावारिस मरीजों के चले जाने और मौत की घटनाएं हो चुकी हैं। हैरानी की बात है कि सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा कर्मियों की मुस्तैदी के दावों के बावजूद अस्पताल प्रशासन को भनक नहीं लगती।
इससे पहले पांच जनवरी को एक युवक का शव जिला अस्पताल गेट के पास नाले में मिला था। जांच में पता चला कि वह अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती था। चार जनवरी की शाम वार्ड से लापता हो गया था। अस्पताल के स्टॉफ ने पुलिस को सूचना नहीं दी थी। पांच जनवरी को नाले में शव मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई तो उसकी पहचान शहर के खजुरिहा बाग मोहल्ला निवासी श्रवण कुमार पाल के रूप में हुई थी।
लावारिस के कराए जा रहे शिनाख्त के प्रयास
जिला अस्पताल परिसर में मरीज का शव मिलने के बाद अब उसकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने शव मर्च्यूरी में रखवाया है। सदर कोतवाली पुलिस का कहना है कि लावारिस शवों की शिनाख्त कराने के प्रयास का नियम है। शव मिलने के 72 घंटे पूरे होने के बाद पोस्टमार्टम कराने और पहचान न होने पर अंतिम संस्कार कराने की पुलिस की जिम्मेदारी है।
नशे के लती मरीजों पर हर समय नहीं रखी जा सकती नजर : सीएमएस
सीएमएस डाॅ. राजीव गुप्ता का कहना है कि जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले अज्ञात मरीजों पर नजर रखी जाती है। जो नशे के लती होते हैं वह भाग जाते हैं, उन पर हर समय नजर नहीं रखी जा सकती है। अस्पताल में ड्यूटी करने वाले गार्डों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ऐसे मरीजों पर नजर रखें। मृत मिले मरीज की बीएचटी न मिलने, लावारिस में भर्ती होने के बाद पुलिस को सूचना न दिए जाने की जो बातें सामने आईं हैं उनकी जांच कराई जा रही है।
नियमानुसार अस्पताल से पुलिस को घायल, जहर, गोली कांड, मारपीट और सड़क हादसों में घायलों की पूरी जानकारी पुलिस सूचना डायरी में नोट कर प्रतिदिन कोतवाली भेजी जाती है। अस्पताल स्टॉफ की ओर से लापरवाही बरती जाती है और सूचना नहीं भेजी जाती। जिस युवक का शव मिला है, जानकारी में आया है कि एक सप्ताह पहले उसे लोगों ने अस्पताल के बाहर टहलते भी देखा था। -अंजनी सिंह, जिला अस्पताल चौकी इंचार्ज