उन्नाव। विशेष न्यायालय एससी एसटी एक्ट ने पुलिस अभिरक्षा में एक अनुसूचित जाति के युवक के साथ मारपीट और गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में पुरवा कोतवाली के पूर्व कोतवाल और दो सिपाहियों पर अनुसूचित जाति उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। कोतवाल मौजूदा समय में सीतापुर जिले के अटरिया कोतवाली के प्रभारी हैं।
पुरवा कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला पश्चिम टोला निवासी अनुसूचित जाति के रिंकू ने विशेष न्यायालय एससी एसटी एक्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। पीड़ित के आरोप लगाया था कि एक नवंबर 2024 की शाम तीन बजे वह अपने परिवार के राजेश के साथ पुरवा कोतवाली के गेट के पास बातचीत कर रहा था। कोतवाली में तैनात सिपाही हर्ष और हिमांशु तिवारी पहुंचे और बिना किसी बात के डांटने और गाली देने लगे।
आरोप है कि कोतवाली पहुंचने पर दोनों सिपाहियों ने दोनों को कंप्यूटर कक्ष में बंद कर दिया था। आरोप है कि तत्कालीन इंस्पेक्टर ने बिना किसी बात के जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया और उनके इशारे पर दोनों सिपाहियों ने कपड़े उतरवाकर लात-घूसों, डंडे और पट्टे से पीटा था। मामला न बढ़े इसलिए दोनों की बाइक सीज कर शांतिभंग में चालान कर दिया था।
परिवार के लोगों ने जिला अस्पताल में मेडिकल कराया और उच्चाधिकारियों से शिकायत की लेकिन पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। एससीएसटी एक्ट की न्यायाधीश कविता मिश्रा ने पीड़ित रिंकू की मेडिकल रिपोर्ट और घटनाक्रम को देखते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससीएसटी और मारपीट धारा में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिया है शिकायतकर्ता रिंकू ने प्रार्थना पत्र के साथ शपथ पत्र, जाति प्रमाण पत्र और एसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र की छाया प्रति भी दाखिल की है।