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Unnao News: दो माह बाद भी बाढ़ से निजात नहीं, 50 गांवों में भरा पानी

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उन्नाव। वर्ष 2011 के बाद इस साल गंगा में आई बाढ़ ने तीन बार खतरे के निशान को पार किया। इसी कारण सई, कल्याणी और लोन नदी भी उफना गईं। यही कारण है कि दो माह से अधिक समय बीत गया लेकिन कटरी के बाढ़ प्रभावित 50 गांवों में अभी भी पानी भरा है। करीब 25 हजार आबादी बाढ़ की दुश्वारियां झेल रही है। न तो अभी तक इनकी फसलों का सर्वे हो पाया है और न ही घरगिरी का किसी को कोई मुआवजा दिया जा सका है।
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15 साल पहले वर्ष 2011 में आई बाढ़ से हालात भयावह हो गए थे। तब प्रशासन को सेना की मदद लेनी पड़ी थी। इस साल आई बाढ़ ने उस साल की याद दिला दी। एक अगस्त से बढ़ना शुरू हुआ गंगा का जलस्तर तीन बार खतरे (शुक्लागंज के अनुसार 113 मीटर) के निशान को पार कर गया। यह स्थिति अक्तूबर के पहले सप्ताह तक बनी रही। इस बार गंगा की बाढ़ से सई, कल्याणी और लोन नदी भी प्रभावित हुई। इनमें पानी बढ़ने से बाढ़ क्षेत्र का दायरा बढ़ता गया और पुरवा क्षेत्र में पहुंच गया।
इससे पूर्व में गंगा की बाढ़ प्रभावित 36 गांवों की संख्या बढ़कर 50 पर पहुंच गई। चार अक्तूबर से गंगा का पानी भले ही उतरने लगा था लेकिन पानी अभी भी सूखा नहीं है। इससे न तो फसल सर्वे ही शुरू हो पाया है और न ही घरगिरी और खराब रास्तों की रिपोर्ट बन पाई है। इसी कारण किसी भी बाढ़ प्रभावित को भी आपदा राहत के नाम पर मुआवजा नहीं दिया जा सका है।
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इंसेट-1
ये गांव हैं बाढ़ प्रभावित
-जमालनगर एहतमाली, जमालनगर गैर एहतमाली, इब्राहिमाबाद, हमजापुर, नीबीगाड़ा, रुपपुर चंदेला एहतमाली, रामपुर, कटरी अल्लीपुर, ददलहा, मुरादपुर, सराय सकहन, कुरसठ, गौरियाकला, छूही, दौलतयारपुर, रामनगर गैर एहतमाली, रामनगर एहतमाली, चकनिहालीखेड़ा, सगवर, पोरई, अढौली, बेहटाभवानी, रसूलपुर, अटवट, कटहर, गढ़ाकोला, जगतखेड़ा, जाजनपुर, मुलाहिमपुर, लालखेड़ा मुस्तहकम, मिश्रनखेड़ा, परियर, ऐरा भदियार, जगदीशपुर, अतरी, हाजीपुर, सथरा, पियारेपुर, सिहुरा, नसरतपुर जंगलेमऊ, भितरेपार, पिडहरी, खजूर आदि।

इंसेट-2
सई नदी का कम हुआ जलस्तर, भादिन झील उफान पर
असोहा। ब्लाक से निकली सई नदी का जलस्तर मंगलवार को कुछ कम हुआ लेकिन भादिन झील अभी भी उफान पर है। सई नदी का जलस्तर कम होने से देवराबाबा घाट के पास से निकले असोहा-नयाखेड़ा संपर्क मार्ग पर पानी कम हुआ। हालांकि फसलों में पानी भरा है। किसान अजय शुक्ल, रमाकांत, जटा मिश्र, नन्हा बाबा, रामाधार यादव, किशोरी यादव, सोनू शुक्ल, उमाकांत सिंह व ह्र्दयनारायन शुक्ल ने बताया कि एक हफ्ते से नदी में पानी भरा होने से फसल खराब हो गई है। अभी तक प्रशासन की ओर से बर्बाद फसल का आंकलन तक नहीं कराया गया। नायब तहसीलदार भरत सिंह ने बताया कि लेखपालों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट मांगी गई है लेकिन पानी होने से सर्वे नहीं हो पा रहा है। पानी कम होने पर ही सर्वे हो पाएगा।



वर्जन...
इस साल तीन बार गंगा का जलस्तर बढ़ा। हर बार पानी कम होने पर जब सर्वे शुरू कराया जाता था तभी फिर से बाढ़ आ जाती। इसी कारण अब तक सर्वे नहीं हो पाया है। अब गंगा का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। राहत आयुक्त ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल सहित अन्य नुकसान का आंकलन कराने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इसको लेकर तहसील अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। हर हाल में सात दिन में सर्वे कराकर मुआवजा देने का काम किया जाएगा। -सुशील कुमार गोंड, एडीएम (वित्त/राजस्व)।
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