हसनगंज। खुद को जिंदा साबित करने के लिए संपूर्ण तहसील समाधान दिवस में पहुंची महिला ने डीएम को लेखपाल के विरुद्ध शिकायतीपत्र दिया। बताया कि लेखपाल ने मृत दिखाकर उसकी जमीन दो अन्य लोगों के नाम कर दी। डीएम ने एसडीएम को टीम गठित करके जांच कराने के निर्देश दिए।
ओगरापुर की माधुरी ने डीएम को बताया कि नारायणपुर गांव में तीन बिस्वा भूमि का बैनामा कराया था। दाखिल-खारिज भी हो चुकी थी। लेखपाल ने उन्हें मृतक दिखाकर भूमि गांव के ही दो लोगों के नाम दर्ज कर दी। डीएम घनश्याम मीणा ने एसडीएम शालिनी तोमर को टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए। औरास ब्लॉक के अंदौरा निवासी सन्नो पत्नी शराफत ने शिकायत करते हुए बताया कि 26 साल पूर्व उन्हें सात बिस्वा भूमि का पट्टा हुआ था। वह भूमि पर काबिज हैं लेकिन आज तक लेखपाल ने भूमि को संक्रमणीय नहीं किया। डीएम ने एसडीएम को एक सप्ताह के भीतर निस्तारण के निर्देश दिए।
हसनगंज कस्बा निवासी सूरज रस्तोगी ने प्रार्थनापत्र देकर बताया कि हसनगंज में तैनात पैरोकार ने बच्चे की बीमारी बताकर 40 हजार रुपये ऑनलाइन लिए थे। मांगने पर गालीगलौज व मुकदमा लिखवाने की धमकी देते हैं। एसपी जयप्रकाश सिंह ने कोतवाल से जांच करने के निर्देश दिए। कुल 325 शिकायतीपत्रों में 21 का मौके पर निस्तारण किया गया। तहसील दिवस में विधायक ब्रजेश रावत भी पहुंचे।
सफीपुर में एसडीएम फाल्गुनी सिंह के पास 87 फरियादी पहुंचे। 10 की समस्याओं का मौके पर निपटारा किया गया। विधायक बंबालाल दिवाकर भी मौजूद रहे। बांगरमऊ में एसडीएम बृजमोहन शुक्ला के पास फतेहपुर चौरासी के ग्राम अहमदाबाद, सेननगर, टांडा सातन, कठिघरा के अनुज कुमार, राजेश, ठाकुर प्रसाद, दयाशंकर, राजबहादुर तथा राम आसरे पहुंचे और प्रार्थनापत्र देकर डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन न बेचने की बात कही। 42 मामलों में आठ का मौके पर निस्तारण किया गया।
बीघापुर में एडीएम सुशील कुमार गोंड के पास 88 प्रार्थनापत्र पहुंचे। मौके पर सात का निस्तारण ही हो सका। कुम्हारी कला के दस लाभार्थियों को भूमि आवंटन के पट्टों के प्रमाणपत्र दिए गए। देवीशंकर ने मानपुर में मंदिर की खाली पड़ी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की। एसडीएम आनंद कुमार नायक मौजूद रहे। पुरवा में सीडीओ कृतिराज के पास 196 शिकायतें पहुंचीं। मौके पर 32 का निस्तारण हुआ। अनुपस्थित 15 अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया। सदर तहसील में एडीएम न्यायिक अमिताभ यादव ने शिकायतें सुनीं। कुल 208 प्रार्थनापत्रों में मात्र 18 का ही निस्तारण हुआ।